लालगंज थानाध्यक्ष के विरुद्ध होगी प्राथमिकी

लालगंज थाना क्षेत्र के बिलनपुर गांव में छापेमारी के दौरान बरामद चोरी के सामान में शामिल सोना, चांदी व नकदी जब्ती सूची में नहीं दर्शाने के मामले में डीआइजी ने लालगंज थानाध्यक्ष और एक अन्य एसआइ पर प्राथमिकी का आदेश दिया है. दोनों अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है. सोमवार को डीआइजी चंदन कुशवाहा इस मामले की जांच करने लालगंज पहुंचे थे. इनके साथ सीआइडी सह एसटीएफ एसपी प्रमोद कुमार, एसपी ललित मोहन शर्मा भी थे.

लालगंज. लालगंज थाना क्षेत्र के बिलनपुर गांव में छापेमारी के दौरान बरामद चोरी के सामान में शामिल सोना, चांदी व नकदी जब्ती सूची में नहीं दर्शाने के मामले में डीआइजी ने लालगंज थानाध्यक्ष और एक अन्य एसआइ पर प्राथमिकी का आदेश दिया है. दोनों अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है. सोमवार को डीआइजी चंदन कुशवाहा इस मामले की जांच करने लालगंज पहुंचे थे. इनके साथ सीआइडी सह एसटीएफ एसपी प्रमोद कुमार, एसपी ललित मोहन शर्मा भी थे. डीआइजी के साथ सभी पदाधिकारियों एवं फारेंसिक की टीम बिलनपुर में उस स्थान पर भी पहुंची, जहां लालगंज थाना पुलिस ने चोरी के सामान बंटवारे की सूचना पर छापेमारी की थी. छापेमारी के दौरान सोना और नकदी बरामद तो किया गया, लेकिन उसका जिक्र जब्ती सूची में नहीं की गयी थी. इस मामले में एसपी ललित मोहन शर्मा ने एएसपी यातायात प्रेम सागर से जांच करायी थी, जांच रिपोर्ट के आधार पर लालगंज थानाध्यक्ष संतोष कुमार एवं एक एसआइ सुमन जी झा को निलंबित कर दिया था. इसी मामले को लेकर सोमवार को डीआइजी चंदन कुशवाहा, एसपी ललित मोहन शर्मा, सीआईडी सह एसटीएफ़ एसपी प्रमोद कुमार, यातायात प्रेम सागर, डीएसपी गोपाल मंडल और फोरेंसिक टीम लालगंज थाना क्षेत्र के बिलनपुर गांव पहुंच कर लोगों से थानाध्यक्ष संतोष कुमार, एसआई सुमन झा पर लगे आरोपों के बारे में घंटों पूछताछ की. ग्रामीणों ने इस संबंध में डीआइजी, एसपी को सारी बातें की जानकारी दी. सीआईडी एवं एसटीएफ एसपी और एएसपी ने लालगंज थाना पहुंच कर छापेमारी में पहुंचे अन्य पुलिस कर्मियों से पूछताछ कर रही है. इस संबंध में डीआइजी ने मीडिया को बताया कि मामले में थानाध्यक्ष सहित अन्य संलिप्त आरोपितों पर प्राथमिकी करने का आदेश दिया गया है. जांच-पड़ताल के बाद प्राथमिकी कर आगे की कार्रवाई की जायेगी. मालूम हो कि लालगंज पुलिस ने 30 दिसंबर को लालगंज थाना क्षेत्र के बिलनपुर गांव के रामप्रीत सहनी के घर छापेमारी कर चोरी का सामान बरामद किया था. इस मामले में पुलिस ने आरोपी रामप्रीत सहनी की पत्नी को पकड़ कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. पुलिस को उसके घर से काफी संख्या में चोरी की बर्तन, तीन टीवी, 2 जिंदा कारतूस, 01 मिस फायर कारतूस सहित, सोना चांदी, नकद बरामद हुआ था, लेकिन न तो जब्ती सूची और न ही प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सोना, चांदी एवं नबद का जिक्र किया गया और न ही जब्ती सूची में अंकित किया गया. इस बारे में सदर-2 एसडीपीओ गोपाल मंडल ने एसपी ललित मोहन शर्मा को जानकारी दी थी, जिसके बाद एसपी ने तुरंत मामले की जांच एडिशनल एसपी यातायात प्रेम सागर से करायी. छापेमारी से संबंधित सभी तथ्यों, अभिलेखों, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच में मामला सही पाया गया. एसआइ सुमन जी झा को निगरानी ने रिश्वत लेते दबोचा था निलंबित और अब प्राथमिकी की जद में आये लालगंज के एसआइ सुमन जी झा की वर्दी पहले भी दागदार हुई थी. वर्ष 2024 में मुजफ्फरपुर में तैनाती के क्रम में इन्हें निगरानी की टीम ने 11 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा था. सिवाईपट्टी थाना में पदस्थापित सुमन झा की गिरफ्तारी थाना क्षेत्र के बंजारा चौक के निकट की गयी थी सुमन झा को अनुमंडल अधिकारी के स्तर पर जमीन विवाद से जुड़े 144 और 163 के मामले में जांच प्रतिवेदन सौंपने को कहा गया था. इस काम को करने के लिए सब इंस्पेक्टर ने पीड़ित पवन कुमार से 11 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी. जिसके बाद रिश्वत लेते निगरानी ने इन्हें दबोच लिया था. बाद में वहां से इनका स्थानांतरण वैशाली हुआ तो इनकी पोस्टिंग लालगंज थाना में हुई. महिला के शोषण एवं ठगी मामले में कार्रवाई नहीं करने का थानाध्यक्ष पर लगा था आरोप मालूम हो कि मध्यप्रदेश के विदिशा जिले की रहने वाली एक महिला को लालगंज के एक डाक्टर द्वारा नौकरी का झांसा देकर 11 जुलाई 2025 को बुलाया. उसे अपने कमरे में ही रखा, रात में डाक्टर ने शराब के नशे में महिला का शारीरिक शोषण किया. आधी रात के बाद महिला किसी तरह वहां से भागी और स्थानीय लोगों को सूचना दी. लोगों ने पुलिस को खबर किया. आरोप था कि थानाध्यक्ष ने आरोपित डाक्टर को थाना बुलाया और इतने गंभीर मामले में पहले तो केस को रफा दफा करवाने का प्रयास किया, बाद में बिना गंभीर धाराओं के मामला दर्ज किया और आरोपित को थाना से ही छोड़ दिया था. महिला डर के मारे लालगंज से चली गयी. मामले की जानकारी मिलने पर एसडीपीओ और वरीय पदाधिकारियों ने पूछा भी, लेकिन थानाध्यक्ष ने स्पष्टीकरण भी देना उचित नहीं समझा था.

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Author: DEEPAK MISHRA

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