hajipur news. सदर अस्पताल में खुले में फेंका जा रहा मेडिकल वेस्ट, संक्रमण की आशंका
मरीज व उनके परिजनों ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाये
कैफ अहमद, हाजीपुर
. सदर अस्पताल परिसर में पोस्टमार्टम हाउस के सामने सड़क किनारे मेडिकल बायो वेस्टेज कचरा फेंका जा रहा है. पोस्टमार्टम हाउस के सामने ऐसे तो कचरा फेंका ही जाता है, पर अब इन दिनों यहां सर्जरी में इस्तेमाल किये गये खून से सने कॉटन, उपयोग की हुई सिरिंज, दवाओं की खाली शीशियां, ग्लव्स सहित अन्य मेडिकल कचरा खुले में पड़ा हुआ है. हैरानी की बात यह है कि इसी रास्ते से रोजाना मरीज, उनके परिजन, अस्पतालकर्मी और आम लोग गुजरते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा बना हुआ है. मेडिकल वेस्टेज का खुले में फेंका जाना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि यह बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम का खुला उल्लंघन भी है. इन नियमों के तहत किसी भी अस्पताल, नर्सिंग होम या स्वास्थ्य संस्थान को अपने यहां होने वाले बायो मेडिकल कचरे का वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से निष्पादन करना अनिवार्य है. लेकिन यहां सदर अस्पताल में ही बायो मेडिकल कचरे अंबार लगा हुआ है.नियमानुसार मेडिकल वेस्टेज को खुले में फेंकना, जलाना या सामान्य कचरे के साथ मिलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसे अस्पताल परिसर के भीतर ही अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थान पर संग्रहित कर कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी के माध्यम से तय समय पर निस्तारित किया जाना चाहिये.
चार रंगों के कंटेनर में जमा किया जाना है मेडिकल वेस्ट
पीले रंग के डिब्बे में मानव अंग, खून से सने कॉटन, पट्टियां, ड्रेसिंग सामग्री जैसे संक्रामक कचरे को डाला जाता है, जिसे बाद में इंसीनरेटर में जलाया जाता है.लाल रंग के डिब्बे में प्लास्टिक से बने उपयोग किए गए मेडिकल उपकरण जैसे कैथेटर, आईवी सेट, सिरिंज (बिना सुई) रखे जाते हैं, जिनका ऑटोक्लेविंग व रिसाइक्लिंग किया जाता है.
सफेद (ट्रांसलुसेंट) कंटेनर में इस्तेमाल की गई सुई, ब्लेड, स्केलपल जैसी नुकीली वस्तुएं रखी जाती हैं, ताकि किसी को चुभन न लगे.नीले रंग के डिब्बे में कांच की बोतलें, एंप्यूल और टूटे कांच को रखा जाता है.
खुले में मेडिकल वेस्ट को इधर-उधर फैलाकर आवारा पशु बढ़ा सकते हैं खतरा
खुले में पड़े बायो कचरा से एचआइवी, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, टीबी और अन्य संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना रहता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. साथ ही आवारा पशु इस कचरे को फैलाकर खतरे को और बढ़ा देते हैं. मरीज व उनके परिजनों ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाये. साथ ही नियमों के अनुसार कचरा निष्पादन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि अस्पताल उपचार का केंद्र बने, बीमारी फैलने का कारण नहीं बने.क्या कहते हैं जिम्मेदार
पोस्टमार्टम हाउस के समीप सामान्य कचरा फेंका जाता है, बायो मेडिकल कचरा सदर अस्पताल में तय जगह पर संग्रहित कर निष्पादित किया जाता है. सदर अस्पताल में बायो मेडिकल कचरा खुले में नहीं फेंका जाता है. अब तक खुले में मेडिकल बायो कचरा फेंकने की जानकारी नहीं मिली है. अगर सामान्य कचरा में मेडिकल बायो कचरा फेंका हुआ है, तो इस मामले की जांच की जायेगी.
डॉ श्याम नंदन प्रसाद, सिविल सर्जन, वैशालीB
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
