हाजीपुर में मत्स्यपालकों के लिए पहल, 31 हजार टन से अधिक मछली उत्पादन, 1000 लोगों को मिला रोजगार

Hajipur fish production : हाजीपुर जिले में मत्स्य उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई सरकारी योजनाएं लागू की गई हैं. 330 मत्स्यपालकों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया है और 1000 से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं. जानें कैसे तालाब विकास, आधुनिक उपकरण और बेहतर विपणन से मत्स्य कारोबार फल-फूल रहा है.

Hajipur fish production : हाजीपुर जिले में मत्स्य उत्पादन और इससे जुड़े रोजगार को बढ़ावा देने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं पर काम किया जा रहा है. मत्स्यपालकों को प्रशिक्षण के साथ तालाब, उपकरण, परिवहन और विपणन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. जिले में कुल मत्स्य उत्पादन 31.02 हजार मीट्रिक टन दर्ज किया गया है, जबकि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत करीब 1000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिले हैं.

330 मत्स्यपालकों को दिया गया तकनीकी प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री मात्स्यिकी विकास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में जिले के 330 मत्स्यपालकों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया है. इसके अलावा उन्नत मत्स्य बीज उत्पादन की 23 इकाइयां स्थापित की गई हैं. मत्स्यपालकों को उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी तकनीकी जानकारी और संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है.

तालाब विकास से बढ़ेगा मत्स्य उत्पादन

सात निश्चय-2 के तहत मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना के माध्यम से जिले में 24 हेक्टेयर क्षेत्र में तालाब विकसित किए गए हैं. इसके अलावा 20 ट्यूबवेल पंप सेट और तीन यांत्रिक एरेटर उपलब्ध कराए गए हैं. दो कार्प हैचरी में इनपुट सहायता देने के साथ एक कार्प हैचरी के जीर्णोद्धार का काम भी किया गया है.

मत्स्य विक्रेताओं को मिले रोजगार के संसाधन

मत्स्यपालकों और मछली विक्रेताओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 120 मत्स्य विक्रेताओं को मत्स्य विपणन किट दी गई है. इसके अलावा आठ फिशिंग बोट, 20 कॉस्ट नेट और रेफ्रिजरेटेड बॉक्स वाले 16 तीन पहिया वाहन उपलब्ध कराए गए हैं. इन संसाधनों से मछलियों को कम समय में बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल रही है.

जिले में 31.02 हजार मीट्रिक टन है मत्स्य उत्पादन

जिले का कुल मत्स्य उत्पादन 31.02 हजार मीट्रिक टन बताया गया है. मत्स्य विभाग की ओर से उत्पादन के साथ-साथ मछलियों के भंडारण, परिवहन और बिक्री की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. इससे मत्स्यपालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है.

पीएम मत्स्य संपदा योजना से विकसित हुईं कई इकाइयां

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जिले में 16 बायोफ्लॉक तालाब, आठ आइस प्लांट-सह-कोल्ड स्टोरेज और चार लघु फीड मिल विकसित की गई हैं. इसके अलावा एक वृहद फीड मिल, दो अलंकारी मछली संवर्धन इकाइयां और आरएएस तकनीक आधारित दो मत्स्य पालन इकाइयां भी विकसित की गई हैं.

परिवहन की सुविधा से आसान हुआ मछली का कारोबार

मत्स्य विक्रेताओं के लिए दो रेफ्रिजरेटेड वाहन, 32 साइकिल-सह-आइस बॉक्स, 13 मोटरसाइकिल-सह-आइस बॉक्स और पांच तीन पहिया वाहन आइस बॉक्स के साथ उपलब्ध कराए गए हैं. इन सुविधाओं से विक्रेता कम समय में अधिक दूरी तक मछली पहुंचाकर उसका कारोबार कर सकेंगे.

1000 लोगों को मिल रहा रोजगार का अवसर

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के क्रियान्वयन से जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 1000 लोगों को रोजगार के अवसर मिलने की बात कही गई है. योजना के तहत 37 हेक्टेयर जलक्षेत्र भी विकसित किया गया है. इससे आने वाले समय में जिले के मत्स्य उत्पादन को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

आम लोगों के लिए बने 10 जीवित मछली बिक्री केंद्र

आम लोगों को स्वच्छ और जीवित मछली आसानी से उपलब्ध कराने के लिए जिले में 10 जीवित मछली बिक्री केंद्र स्थापित किए गए हैं. इससे उपभोक्ताओं को स्थानीय स्तर पर ही जीवित मछली खरीदने की सुविधा मिल रही है.

तकनीकी मदद के लिए बने दो मत्स्य सेवा केंद्र

मत्स्यपालकों को तकनीकी जानकारी देने और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान उपलब्ध कराने के लिए जिले में दो प्रसार एवं सलाह केंद्र यानी मत्स्य सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं. इन केंद्रों के माध्यम से मत्स्यपालकों को उत्पादन और पालन से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है.

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By कैफ अहमद

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