Hajipur News : नौकरी का झांसा देकर किशोरी से दुष्कर्म करने वाले दोषी को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा

पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश ने मंगलवार को करीब तीन वर्ष पूर्व झारखंड की एक नाबालिग अनुसूचित जाति की किशोरी को नौकरी का झांसा देकर हाजीपुर बुलाने और उसके साथ दुष्कर्म के मामले में एक अभियुक्त को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनायी है.

हाजीपुर.

पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश ने मंगलवार को करीब तीन वर्ष पूर्व झारखंड की एक नाबालिग अनुसूचित जाति की किशोरी को नौकरी का झांसा देकर हाजीपुर बुलाने और उसके साथ दुष्कर्म के मामले में एक अभियुक्त को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. साथ ही 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है. यह जानकारी पॉक्सो के विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा ने दी. उन्होंने बताया कि पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली थाना क्षेत्र के भटहां निवासी आदित्य कुमार उर्फ अखिलेश कुमार ने झारखंड की एक 16 वर्षीया अनुसूचित जाति की बच्ची को मोबाइल पर कॉल कर एक दवा कंपनी में छह हजार पांच सौ रुपये वेतन देने का झांसा देकर हाजीपुर बुलाया था. 19 जुलाई, 2022 को वह अपने अपने पिता के साथ मौर्य एक्सप्रेस से हाजीपुर पहुंची. हाजीपुर स्टेशन से आरोपित ने उसके पिता का यह कह कर वापस लौटा दिया कि उसकी बच्ची को किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी. इसके बाद वह किशोरी को सदर थाना क्षेत्र स्थित जेल के निकट एक दूसरी युवती के रूप पर ले गया. वहां युवती के साथ ही उसे रहने के लिए कह कर वह चला गया. कुछ देर बाद आरोपित वहां आया और जिस युवती का रूम था उसे ऑफिस जाने के बहाने वहां से हटा दिया. इसके बाद आरोपित ने किशोरी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाया. पीड़िता ने इस मामले में सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. पुलिस ने इस मामले में 29 अप्रैल, 2023 को न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया. न्यायालय में 17 जुलाई को संज्ञान लिया. इस मामले में आदित्य कुमार उर्फ अखिलेश कुमार के विरुद्ध 25 जुलाई, 2023 को आरोप गठन किया गया. इस मामले में विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा द्वारा कराये गये नौ साक्षियों एवं 18 प्रदर्श के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के बाद बीते सात मार्च को आदित्य कुमार उर्फ अखिलेश कुमार को नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में दोषी करार दिया गया. मंगलवार को सजा के बिंदू पर सुनवाई के बाद आदित्य कुमार उर्फ अखिलेश कुमार को 10 वर्षों का सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी गयी. अर्थदंड की राशि पीड़िता को भुगतान करने का आदेश दिया गया है. अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा सुनायी गयी है.

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