गोपालगंज में टला तिब्बत से आए सैलाब का खतरा, गंडक खतरे के निशान से 26 सेमी नीचे, तटबंधों की निगरानी जारी

गंडक नदी में तिब्बत से आने वाले सैलाब का खतरा टल गया है। नदी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन प्रशासन दियारा के इलाकों में 24 घंटे अलर्ट मोड पर है।

Gopalganj Floods : गोपालगंज में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF के बाद तिब्बत से आने वाले सैलाब का खतरा फिलहाल टल गया है. नेपाल पहुंचने तक पानी का बहाव कमजोर पड़ गया, जिससे गंडक के दियारा क्षेत्र के लोगों को राहत मिली है. हालांकि नेपाल के तराई इलाकों में शनिवार को हुई बारिश के कारण रविवार शाम तक नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना है. प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें तटबंधों पर लगातार निगरानी कर रही हैं.

तिब्बत से आए सैलाब का खतरा फिलहाल टला

तिब्बत से आने वाले पानी के कारण गंडक नदी में बाढ़ की आशंका बनी हुई थी. हालांकि नेपाल तक पहुंचते-पहुंचते पानी का बहाव कमजोर पड़ गया. इससे गोपालगंज के दियारा इलाके के निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों को फिलहाल राहत मिली है.

नदी में आ रहे पहाड़ी जीव-जंतु

तिब्बत की ओर से आए पानी के साथ जंगली और पहाड़ी इलाकों के सर्प समेत कई तरह के जीव-जंतु नदी में बहकर आने की बात सामने आई है. इससे दियारा क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है. स्थानीय लोग नदी की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.

नेपाल की बारिश से फिर बढ़ सकता है जलस्तर

नेपाल के तराई क्षेत्रों में शनिवार को बारिश हुई है. इसके असर से रविवार शाम तक गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. प्रशासन इस स्थिति को देखते हुए नदी के जलस्तर और तटबंधों की लगातार निगरानी कर रहा है.

खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर नीचे गंडक

गोपालगंज में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर नीचे दर्ज किया गया. रविवार सुबह 6 बजे वाल्मीकिनगर बराज से गंडक नदी में 1.14 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया.

जुलाई में 2.24 लाख क्यूसेक पानी पार कर चुका है

इस सीजन में गंडक नदी का सबसे अधिक डिस्चार्ज 17 जुलाई को दर्ज किया गया था. उस दिन वाल्मीकिनगर बराज से 2.24 लाख क्यूसेक पानी का बहाव रहा था और पानी गोपालगंज से सफलतापूर्वक गुजर गया था. जल संसाधन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार इससे अधिक पानी आने की स्थिति में भी तटबंधों पर फिलहाल किसी तरह का असर दिखाई नहीं दे रहा है.

तटबंधों की 24 घंटे निगरानी

नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे होने के बावजूद जल संसाधन विभाग के अभियंता तटबंधों की लगातार निगरानी कर रहे हैं. बाढ़ संघर्षात्मक बल के अध्यक्ष नवल किशोर सिंह, मुख्य अभियंता प्रमोद कुमार, अधीक्षण अभियंता और कार्यपालक अभियंता मो. साजिद इकबाल समेत अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं.

खाप मकसूदपुर में शांत पड़ी गंडक नदी

विशंभरपुर में भी अधिकारी मुस्तैद

विशंभरपुर क्षेत्र में पवन कुमार समेत विभागीय कर्मी तटबंधों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. किसी भी संभावित बदलाव की जानकारी तत्काल विभाग और प्रशासन को देने की व्यवस्था की गई है.

डीएम भी कर रहे लगातार मॉनिटरिंग

जिला प्रशासन भी गंडक नदी के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर नजर रख रहा है. डीएम समीर सौरभ लगातार स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. प्रशासन की प्राथमिकता निचले इलाकों और तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

अलग-अलग जगहों पर खतरे के निशान से नीचे नदी

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विशंभरपुर में गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर नीचे दर्ज किया गया. पतहरा में नदी 1.10 मीटर नीचे और टंडसपुर में 62 सेंटीमीटर नीचे रही. इन इलाकों में जलस्तर की निगरानी जारी है.

दियारा के लोगों को मिली राहत

गंडक नदी की स्थिति और उसके स्वभाव से दियारा क्षेत्र के लोग अच्छी तरह परिचित हैं. फिलहाल निचले इलाकों के लोगों को बाढ़ के तत्काल खतरे से राहत मिली है. हालांकि नेपाल में बारिश के कारण संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है.

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By संजय कुमार अभय

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