विशंभरपुर में हाथी पांव डालकर कटाव को रोकने में विभाग हुआ सफल, शाम को बंद हुआ काम

गंडक नदी के जल स्तर का हर पल घटना-बढ़ना जारी है. गंडक नदी के उग्र धारा को विशंभरपुर में जल संसाधन विभाग की टीम जंग लड़कर शांत करने में सफल रही.

गोपालगंज. गंडक नदी के जल स्तर का हर पल घटना-बढ़ना जारी है. गंडक नदी के उग्र धारा को विशंभरपुर में जल संसाधन विभाग की टीम जंग लड़कर शांत करने में सफल रही. हाथी पांव, नाइलॉन कैरेट व झाड़ी को डालकर नदी को शांत किया. रविवार को जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता संजय कुमार, बाढ़ संघर्षात्मक बल के अध्यक्ष नवल किशोर सिंह की टीम ने विशंभरपुर पहुंच कर स्थिति का आकलन करने के बाद बचाव कार्य को बंद करने का आदेश दिया. हालांकि नदी में करेंट बहुत होने के साथ ही पुरवा हवा के 10 किमी की रफ्तार से चलने के कारण कटाव के खतरा को देखते हुए इंजीनियरों की टीम को अलर्ट मोड में रहने के लिए कहा गया है. मौके पर कार्यपालक अभियंता पवन कुमार के नेतृत्व में सहायक अभियंता एकता कुमारी, कनीय अभियंता शिवकुमार सिंह,आदि बांध बचाने में जुटे हैं. यहां बता दें कि गंडक नदी में यूपी सरकार की ओर से अहिरौलीदान के पास बोल्डर से स्पर बनाये जाने के कारण भसही से विशंभरपुर के बीच में नदी शिफ्ट कर रही. इससे पहले झील को काटने के बाद अब नदी का कटाव बांध के पास पहुंच गया था. अभियंताओं की टीम ने बांध को पूरी तरह से सुरक्षित बताया है. कटाव से बांध काे कोई खतरा नहीं है. नेपाल में हल्की बारिश के कारण गंडक नदी का जल स्तर घट-बढ़ रहा है. रविवार को पोखरे में 6 एमएम बारिश होने से नदी का जल स्तर स्थिर बना हुआ है. वाल्मीकिनगर बराज से रविवार की सुबह 99 हजार क्यूसेक डिस्चार्ज रहा, तो शाम में 1.08 लाख क्यूसेक हो गया. इससे विशंभरपुर में खतरे के निशान से 58 सेमी, तो पतहरा में 80 सेमी नीचे रहा. वहीं टंडसपुर में 15 सेमी खतरे के निशान से नीचे बह रही थी. वहीं दूसरी ओर गंडक नदी के पानी के हटने के बाद मांझा प्रखंड के गौसिया बेसिक स्कूल में जाने वाली सड़क को टूटा देख ग्रामीणों में बेचैनी बढ़ गयी. गांव के पूर्व मुखिया राधारमण मिश्र ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी. मौके पर पहुंचे कार्यपालक अभियंता प्रमोद कुमार ने स्थिति को देखने के बाद काम करने से मना कर दिया. नदी में सड़क होने के कारण विभाग ने बचाव कार्य करने से इनकार किया, तो मुखिया रागिनी मिश्रा ने बालू भरे बोरा को डलवा कर सड़क के टूटे हुए स्थल को भरवाया, जिससे स्कूल में आने-जाने वाले शिक्षक व बच्चों को दिक्कत नहीं हो सके.

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