गैर-जमानती वारंट के निष्पादन में लापरवाही पर सख्त कोर्ट, उचकागांव व कटेया के थानेदार तलब

चिंता: कोर्ट से जारी गैर जमानतीय वारंट पर सूचना देकर कोर्ट को लौटा रहे पुलिस अफसर – कोर्ट ने माना, पुलिस का ऐसा कृत्य कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं

Gopalganj News : गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के निष्पादन में कथित लापरवाही को लेकर गोपालगंज व्यवहार न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश-9 राकेश रंजन सिंह की अदालत ने उचकागांव और कटेया के थानाध्यक्षों को तलब करते हुए वारंट के निष्पादन में की गई कार्रवाई का विस्तृत जवाब मांगा है.

पुलिस कोर्ट को सूचना देकर वारंट वापस किया

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद पुलिस ने संबंधित साक्षियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत करने के बजाय केवल सूचना देकर वारंट वापस कर दिया. अदालत ने प्रथम दृष्टया इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता माना है.

थानाध्यक्ष को न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया

अदालत ने उचकागांव के थानाध्यक्ष को पुलिस अधीक्षक के माध्यम से नोटिस जारी कर 29 जुलाई को स्वयं न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है. साथ ही निर्देश दिया गया है कि वे यह स्पष्ट करें कि वारंट के निष्पादन के लिए अब तक क्या-क्या कार्रवाई की गई और इस संबंध में विस्तृत प्रतिवेदन भी प्रस्तुत करें.

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से ऐसा प्रतीत होता है कि साक्षियों की अनुपस्थिति सुनिश्चित कर अभियुक्तों को अनुचित लाभ पहुंचाने की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिससे मामले के ट्रायल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.

वारंट पर गिरफ्तारी करना पुलिस की जिम्मेदारी

सत्रवाद संख्या 540/2023 (उचकागांव थाना कांड संख्या 304/2022) में कई साक्षियों के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था. कानूनविद वेद प्रकाश तिवारी ने बताया कि न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस की कानूनी जिम्मेदारी संबंधित वारंटी को गिरफ्तार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की होती है.

साक्षियों की अनुपस्थिति से प्रभावित हो रही सुनवाई

उचकागांव थाना क्षेत्र के सिसवनिया गांव निवासी बाबूलाल राय, उदयशंकर राम, सुशीला देवी, सुमित्रा राय तथा अमृत पांडेय के विरुद्ध जारी गैर-जमानती वारंट को पुलिस ने यह टिप्पणी करते हुए वापस कर दिया कि संबंधित लोगों को सूचना दे दी गई है. अदालत ने इस प्रतिवेदन को असंतोषजनक माना है.

कटेया के थानेदार को भी कोर्ट में होना होगा पेश

इसी प्रकार जिला एवं सत्र न्यायाधीश-9 की अदालत ने सत्रवाद संख्या 52/2023 (कटेया थाना कांड संख्या 162/2018) में भी कटेया के थानाध्यक्ष को समन जारी किया है. अदालत ने उन्हें स्वयं उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि गैर-जमानती वारंट के निष्पादन एवं साक्षियों की गिरफ्तारी के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए. कोर्ट ने पुलिस की ओर से प्रस्तुत प्रतिवेदन को संतोषजनक नहीं माना है.

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Published by: Sanjay kumar abhay

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