Gopalganj News: पलक झपकाने और मुस्कुराने' में बीत रही गुरुजी की पहली घंटी, शिक्षा विभाग के नए 'टैब' सिस्टम ने बढ़ाई परेशानी

Gopalganj News: पलक झपकाने और मुस्कुराने' में बीत रहा गुरु जी का समय: नई हाजिरी प्रणाली ने बढ़ाई शिक्षकों की परेशानी पढिए पूरी खबर नीचे

Gopalganj News: (प्रशांत पाठक) सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के दावों के बीच, धरातल पर नई उपस्थिति प्रणाली शिक्षकों के लिए जी का जंजाल बन चुकी है. पहले जहां शिक्षक अपने मोबाइल से ‘ई-शिक्षाकोष’ पोर्टल पर आसानी से अपनी उपस्थिति दर्ज कर सीधे शैक्षणिक गतिविधियों में जुट जाते थे. वहीं सरकार के नए दिशा-निर्देशों ने उनकी मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं. अब शिक्षकों को मोबाइल ऐप के साथ-साथ स्कूल में दिए गए टैबलेट (टैब) पर भी अलग से हाजिरी बनानी पड़ रही है. जिसमें मुस्कुराने और पलक झपकाने जैसे ऑप्शन दिए गए हैं.जो शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है.

दोहरे सिस्टम और तकनीकी उलझनों की मार


एक ही समय पर अलग-अलग दो माध्यमों से उपस्थिति दर्ज करने की इस प्रक्रिया ने स्कूलों की सुबह की सुचारू व्यवस्था को प्रभावित किया है. नए नियम के मुताबिक, टैबलेट पर हाजिरी दर्ज करते समय चेहरा प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है. इसके तहत शिक्षकों को कैमरे के सामने ‘पलक झपकाने’ और ‘मुस्कुराने’ जैसी गतिविधियां करनी पड़ती हैं.अक्सर खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी, सर्वर डाउन होने या टैब की धीमी प्रोसेसिंग के कारण यह सिस्टम एक बार में चेहरा डिटेक्ट नहीं कर पाता. नतीजा यह हो रहा है कि शिक्षकों की पहली घंटी सिर्फ मुस्कुराने और पलक झपकाने के इस ‘तकनीकी खेल’ में ही बीत जा रही है. इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है.

समय की बर्बादी और अविश्वास का माहौल


इस नई व्यवस्था को लेकर शिक्षकों के भीतर गहरा असंतोष और नाराजगी है. नाम न छापने की शर्त पर प्रखंड की एक शिक्षिका ने बताया “जब ‘ई-शिक्षाकोष’ पोर्टल पर पहले से ही हमारी उपस्थिति दर्ज हो रही है, तो फिर टैबलेट से दोबारा हाजिरी बनवाने का कोई तार्किक औचित्य नहीं है.यह सीधे तौर पर कीमती शैक्षणिक समय का नुकसान है. वहीं, एक अन्य शिक्षक ने शिक्षा विभाग के इस कड़े और अव्यावहारिक मापदंड पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने कहा कि स्कूल और शिक्षक पूरे देश में हैं, लेकिन बिहार के शिक्षकों पर जिस तरह के कड़े नियम थोपे जा रहे हैं. उससे पूरे देश में एक गलत संदेश जा रहा है. ऐसा लगता है जैसे बिहार के शिक्षकों को सरकार जानबूझकर ‘कामचोर’ या ‘भगोड़ा’ साबित करने पर तुली हुई है.जो कि पूरी निष्ठा से काम करने वाले शिक्षकों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाता है.

धरातल की हकीकत बनाम विभागीय नियम:


विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि इस दोहरी प्रणाली से फर्जी हाजिरी पर पूरी तरह रोक लगेगी और पारदर्शिता आएगी. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में न तो बेहतर इंटरनेट है और न ही ये तकनीकी उपकरण सुचारू रूप से काम करते हैं.

शिक्षक संगठनों का भी कहना है कि वे तकनीक या हाजिरी के विरोधी नहीं हैं. लेकिन ऐसी व्यवस्था लागू होनी चाहिए जो व्यावहारिक हो, न कि वह जो शिक्षकों का समय बर्बाद करे और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करे. फिलहाल, उचकागांव प्रखंड सहित पूरे क्षेत्र में यह नई डिजिटल हाजिरी प्रणाली सुधार के बजाय सिरदर्द साबित हो रही है.

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लेखक के बारे में

Published by: Vivek Pandey

विवेक पाण्डेय टीवी चैनल के माध्यम से पिछले 7 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हूं . करियर की शुरुआत Network 10 National News Channel से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहा हूं. देश और राज्य की राजनीति, कृषि और शिक्षा में रुचि रखता हूं.

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