गोपालगंज में खेत बचाओ अभियान के तहत 12 पंचायतों में मेगा कृषि शिविर, किसानों ने सीखे जैविक खेती के गुर

Gopalganj News: गोपालगंज के फुलवरिया प्रखंड में खेत बचाओ अभियान के तहत 12 पंचायतों में मेगा कृषि शिविर आयोजित हुआ. किसानों को जैविक खेती, गोबर-गोमूत्र आधारित खाद, प्राकृतिक कृषि और खेती की लागत कम करने के उपाय बताए गए.

Gopalganj News: (राकेश कुमार) गोपालगंज जिले के फुलवरिया प्रखंड की मिट्टी की सेहत सुधारने और किसानों की खेती की लागत कम करने के उद्देश्य से शुक्रवार को कृषि विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की. जिला कृषि पदाधिकारी के निर्देश पर फुलवरिया प्रखंड की सभी 12 ग्राम पंचायतों में एक साथ मेगा कृषि शिविर का आयोजन किया गया. प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) आलोक कुमार के नेतृत्व में चलाए गए इस विशेष अभियान को ‘खेत बचाओ अभियान’ नाम दिया गया. शिविरों में बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों को रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई और उन्हें जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया.

गोबर और गोमूत्र से बने जैविक खाद के उपयोग पर दिया गया जोर

सभी पंचायतों में तैनात कृषि कर्मियों और समन्वयकों ने किसानों को पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती की ओर लौटने की सलाह दी. बीएओ आलोक कुमार ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से खेतों की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही है. इसे बचाने का सबसे प्रभावी उपाय जैविक खेती है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने खेतों में गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार जैविक खादों का अधिक से अधिक उपयोग करें. इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहेगी और पर्यावरण तथा भूमिगत जल भी सुरक्षित रहेगा.

कृषि विशेषज्ञों ने मौके पर किया समस्याओं का समाधान

मेगा कृषि शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी नहीं दी गई, बल्कि उनकी व्यावहारिक समस्याओं का भी समाधान किया गया. कृषि विशेषज्ञों से किसानों ने रासायनिक खादों के विकल्प, जैविक कीटनाशक बनाने की विधि और फसलों में लगने वाली बीमारियों से बचाव को लेकर सीधे सवाल पूछे. विशेषज्ञों ने मौके पर ही उनके समाधान और आवश्यक तकनीकी सुझाव उपलब्ध कराए.

खेती की लागत घटाने और आय बढ़ाने पर फोकस

बीएओ आलोक कुमार ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों की खेती की लागत को न्यूनतम स्तर तक लाना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है. शिविर के दौरान किसानों का पंजीकरण भी किया गया, ताकि भविष्य में उन्हें सरकारी योजनाओं और कृषि अनुदान का सीधा लाभ मिल सके. कार्यक्रम में शामिल किसानों ने रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करते हुए धीरे-धीरे जैविक खेती अपनाने का संकल्प व्यक्त किया.

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By Vivek Ranjan

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