Gopalganj News (कुचायकोट से राजेश पांडेय की रिपोर्ट): बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल का जल’ योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है. कुचायकोट प्रखंड के ढोढवालिया पंचायत से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां पिछले एक वर्ष से अधिक समय से नल-जल योजना पूरी तरह बंद पड़ी है. रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है. दावों के विपरीत आज तक लोगों के घरों की टोटियों से पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची.
भीषण गर्मी के इस दौर में, जब पानी की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब ग्रामीण दूसरे के घरों या निजी चापाकलों से पानी ढोने को मजबूर हैं. वहीं बीडीओ सुनील कुमार मिश्र से पूछने पर उनके द्वारा बताया गया कि अब टंकी का कार्य पीएचइडी विभाग संभाल रहा है. उनको सूचित कर दिया गया है. उनके स्तर से ही उसे दुरूस्त कराया जायेगा.
बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक साल के दौरान कई बार पाइपलाइन की मरम्मत कराई गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मोटर सही है, पानी की टंकी भी दुरुस्त है. ऑपरेटर अपनी सुविधानुसार मोटर चलाकर पानी की टेस्टिंग कर लेते हैं, लेकिन घरों तक नियमित जलापूर्ति नहीं की जाती. पानी के अभाव में इस तपती गर्मी में लोगों का जीवन कठिन हो गया है.
अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुके हैं ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या से अधिकारी अनजान नहीं हैं. स्थानीय लोगों ने कई बार संबंधित पदाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को शिकायत पत्र सौंपा तथा समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. भीषण गर्मी के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता के कारण सरकार की करोड़ों रुपये की योजना सफेद हाथी साबित हो रही है.
ग्रामीणों की मांग, जल्द शुरू हो जलापूर्ति
ढोढवालिया पंचायत के आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि कागजी खानापूर्ति और टेस्टिंग के बजाय तत्काल घरों तक पानी की सप्लाई शुरू कराई जाए. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे.
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