Gopalganj news:( प्रशांत पाठक) गोपालगंज जिले के उचकागांव प्रखंड के लुहसी पंचायत भवन के समीप ‘कृषि जन कल्याण सह खेत बचाओ अभियान’ का आयोजन किया गया.इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक रासायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर प्रेरित करना तथा कृषि क्षेत्र में हो रहे आधुनिक नवाचारों से उन्हें अवगत कराना था. कार्यक्रम में क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.
प्राकृतिक खेती समय की मांग
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, प्रखंड कृषि पदाधिकारी गौरव कुमार वरुण ने अपने संबोधन में कहा कि मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए अब प्राकृतिक खेती ही एकमात्र विकल्प है. उन्होंने किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग कम करने की सलाह दी.श्री वरुण ने सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं, विशेष रूप से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और कृषि इनपुट सब्सिडी के बारे में विस्तार से चर्चा की. उन्होंने जोर देकर कहा कि मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें, ताकि खेती की लागत कम हो और पैदावार की गुणवत्ता में सुधार हो.
कृषि तकनीकों से आय में वृद्धि
कृषि समन्वयक अरविंद कुमार कुशवाहा ने खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए फसल चक्र और विविधीकरण को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने किसानों को व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि यदि किसान अपनी फसल प्रणाली में बदलाव लाते हैं और जैविक खाद का उपयोग बढ़ाते हैं, तो न केवल उनकी लागत घटेगी बल्कि बाजार में उनकी उपज को बेहतर दाम भी मिलेंगे.
कार्यक्रम में उपस्थित सहायक तकनीकी प्रबंधक पंकज कुमार एवं धनंजय कुमार ने आधुनिक कृषि तकनीकों पर प्रकाश डाला. उन्होंने ‘ड्रिप सिंचाई’ (टपक सिंचाई) को जल संरक्षण के लिए सबसे प्रभावी विधि बताया. उन्होंने कहा कि सही बीज का चयन और वैज्ञानिक विधि से किया गया जल प्रबंधन किसान की आय को दोगुना करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
किसानों की भागीदारी और शंका समाधान
किसान सलाहकार कौशल किशोर ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल खेती करने की सरल विधियों पर चर्चा की. उन्होंने किसानों को खेत स्तर पर मिट्टी का नमूना लेने और उसे परीक्षण के लिए भेजने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया.
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा किसान- अधिकारी संवाद रहा. कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने खेती के दौरान आने वाली अपनी व्यावहारिक समस्याओं, जैसे कीट प्रकोप, बीजों की उपलब्धता और बाजार में उपज की सही कीमत न मिल पाने जैसी चुनौतियों को अधिकारियों के समक्ष रखा. अधिकारियों ने किसानों की इन शंकाओं का समाधान किया और उन्हें विभागीय योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी.
यह अभियान न केवल किसानों को नई तकनीकों से लैस करने का एक माध्यम बना, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया. कार्यक्रम के अंत में किसानों ने जैविक खेती को अपनाने और रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को कम करने का संकल्प लिया.
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