खाली खेत से किसान ने कमाए 34,800 रुपये, गोपालगंज में गरमा धान की खेती बनी मिसाल

Bihar Agriculture News: गोपालगंज के हरिहरपुर गांव के किसान अवध बिहारी सिंह ने आत्मा (ATMA) योजना के तकनीकी सहयोग से गर्मियों में खाली पड़े एक एकड़ खेत में गरमा धान की खेती कर महज तीन महीने में 34,800 रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया.

Bihar Agriculture News: रबी फसल की कटाई के बाद गर्मियों में खाली पड़े खेत भी किसानों की अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया बन सकते हैं. सदर प्रखंड के हरिहरपुर गांव के प्रगतिशील किसान अवध बिहारी सिंह ने इसे साबित कर दिखाया है. कृषि विभाग की आत्मा (एटीएमए) योजना से मिली तकनीकी जानकारी और वैज्ञानिक खेती अपनाकर उन्होंने एक एकड़ खेत में गरमा धान की खेती से महज तीन महीने में 34,800 रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया. उनकी सफलता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है.

पहले मार्च से जून तक खाली रहता था खेत

करीब दो हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि वाले अवध बिहारी सिंह पहले खरीफ में धान और रबी में गेहूं की पारंपरिक खेती करते थे. गेहूं की कटाई के बाद मार्च से जून तक उनका एक एकड़ खेत खाली पड़ा रहता था. सिंचाई की सुविधा होने के बावजूद खेत का उपयोग नहीं हो पाता था, जिससे अतिरिक्त आय का अवसर भी समाप्त हो जाता था.

किसान चौपाल से मिली नई सोच

आत्मा योजना के तहत आयोजित किसान चौपाल में उन्हें गरमा धान की खेती की जानकारी मिली. कृषि तकनीकी प्रबंधक अमित राज, विनय कुमार और देवेंद्र कुशवाहा ने उन्नत बीज, सिंचाई प्रबंधन, बीज शोधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी.

विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने एक एकड़ खेत में गरमा धान लगाने का निर्णय लिया. फरवरी के अंतिम सप्ताह में नर्सरी तैयार की गई और मार्च के तीसरे सप्ताह तक रोपाई पूरी कर ली गई. नियमित सिंचाई, संतुलित उर्वरकों के प्रयोग और जैविक कीटनाशकों के छिड़काव से लगभग 100 से 110 दिनों में जून में फसल तैयार हो गई.

एक एकड़ में 24 क्विंटल धान का उत्पादन

वैज्ञानिक खेती का परिणाम यह रहा कि एक एकड़ खेत से 24 क्विंटल गरमा धान का उत्पादन हुआ. इससे किसान को मात्र तीन महीने में 34,800 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ.

अवध बिहारी सिंह का कहना है कि पहले गर्मियों में उनका खेत बेकार पड़ा रहता था, लेकिन अब वही खेत परिवार की अतिरिक्त आय का मजबूत आधार बन गया है.

आसपास के किसान भी अपना रहे मॉडल

उनकी सफलता को देखकर हरिहरपुर और एकडेरवा पंचायत के कई किसान अब गरमा धान और अन्य जायद फसलों की खेती की तैयारी कर रहे हैं. कृषि विभाग का मानना है कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे रबी फसल के बाद खाली खेतों में गरमा धान की खेती कर अपनी सालाना आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं.

आत्मा योजना का तकनीकी सहयोग बना सफलता की कुंजी

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस सफलता के पीछे सुनिश्चित सिंचाई व्यवस्था, उन्नत बीजों का चयन, वैज्ञानिक खेती की तकनीक और आत्मा (एटीएमए) योजना के तहत लगातार मिला तकनीकी मार्गदर्शन सबसे महत्वपूर्ण रहा. विभाग किसानों को फसल विविधीकरण अपनाकर आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रेरित कर रहा है.

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Author: Prabhat khabar news desk

Published by: Vivek Pandey

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