गोपालगंज: कलश यात्रा के दौरान दाहा नदी में डूबे छात्र का शव 24 घंटे बाद बरामद, एसडीआरएफ ने चलाया सर्च अभियान

गोपालगंज के लकड़ी दरगाह गांव निवासी 20 वर्षीय छात्र सूरज कुमार का शव दाहा नदी से बरामद हुआ है. वह कलश यात्रा में जल भरने के दौरान गहरे पानी में चला गया था. 24 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद एसडीआरएफ की टीम ने शव को कीचड़ से बाहर निकाला.

Gopalganj News: सीवान जिले के बड़हरिया थाना क्षेत्र के लकड़ी दरगाह गांव निवासी 20 वर्षीय छात्र सूरज कुमार का शव 24 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दाहा नदी से बरामद कर लिया गया. गोपालगंज से पहुंची एसडीआरएफ की टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से नदी में सर्च अभियान चलाया और कीचड़ में फंसे शव को बाहर निकाला. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया.

कलश यात्रा के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, सावन की पहली सोमवारी पर लकड़ी दरगाह स्थित शिव मंदिर से दाहा नदी के नवीगंज घाट तक जल भराई के लिए कलश यात्रा निकाली गई थी. गांव निवासी श्री भगवान साह और सोनी देवी का इकलौता पुत्र सूरज कुमार भी इस धार्मिक यात्रा में शामिल था. जल भरने के दौरान वह नदी के गहरे पानी में चला गया और डूब गया.

24 घंटे बाद एसडीआरएफ को मिली सफलता

काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की. सोमवार को स्थानीय स्तर पर काफी खोजबीन की गई, लेकिन उसका पता नहीं चल सका. मंगलवार सुबह गोपालगंज से पहुंची एसडीआरएफ की टीम ने सर्च अभियान चलाया और घटनास्थल से कुछ दूरी पर नदी के कीचड़ में फंसा शव बरामद कर लिया. इस दौरान दाहा नदी के दोनों किनारों पर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा रही.

पटना में रहकर कर रहा था एसएससी की तैयारी

बताया जाता है कि सूरज अपने माता-पिता की इकलौती संतान था. उसके पिता श्री भगवान साह और मां सोनी देवी सूरत में रहकर मजदूरी करते हैं. सूरज ने मीरगंज के साहू जैन हाई स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद इस वर्ष परीक्षा उत्तीर्ण की थी और वर्तमान में पटना में रहकर एसएससी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था. वह केवल कलश यात्रा में शामिल होने के लिए गांव आया था.

परिजनों में मचा कोहराम

सूरज की असमय मौत की खबर से परिवार में मातम पसरा है. माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है. इस हृदयविदारक घटना से सिवान और गोपालगंज के सीमावर्ती क्षेत्रों में शोक की लहर फैल गई है.

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By प्रशांत पाठक

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