Buncheya School: शिक्षक दिवस के अवसर पर सिधवलिया प्रखंड का उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बुंचेया शिक्षा, सुरक्षा, संस्कार और सृजन का मॉडल बनकर उभर रहा है. करीब एक वर्ष पहले तक सामान्य रूप से संचालित होने वाले इस विद्यालय की तस्वीर अब काफी बदल गयी है. इस बदलाव में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका दिव्या सिंह की पहल और नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
करीब एक वर्ष पहले प्रधानाध्यापिका का पदभार संभालने के बाद दिव्या सिंह ने विद्यालय में अनुशासन, स्वच्छता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता दी. उनके नेतृत्व में विद्यालय परिसर को व्यवस्थित किया गया और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया. विद्यालय में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
बाल संसद के नेतृत्व में होता है चेतना सत्र
विद्यालय में विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गयी है. परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं, जिससे विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों पर निगरानी रखी जाती है.
प्रतिदिन आयोजित होने वाला चेतना सत्र बाल संसद के नेतृत्व में संचालित होता है. इससे विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है. बच्चों को विद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर भी मिलता है.
स्मार्ट क्लास से पढ़ाई को बनाया जा रहा रोचक
डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था की गयी है. इसके माध्यम से विद्यार्थियों को विषयों को आधुनिक और रोचक तरीके से समझाने का प्रयास किया जा रहा है.
विद्यालय के पुस्तकालय और विज्ञान प्रयोगशाला का भी नियमित उपयोग कराया जा रहा है. इससे विद्यार्थियों में पढ़ने, समझने और प्रयोग के माध्यम से सीखने की रुचि बढ़ रही है.
इको क्लब के जरिये पर्यावरण संरक्षण का संदेश
विद्यालय का इको क्लब भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है. क्लब की ओर से पौधारोपण, स्वच्छता अभियान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं.
पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को खेलकूद, पेंटिंग, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है. इसका उद्देश्य बच्चों के शैक्षणिक विकास के साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को भी आगे बढ़ाना है.
अभिभावकों ने कहा, स्कूल के माहौल में आया सकारात्मक बदलाव
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि दिव्या सिंह के प्रधानाध्यापिका बनने के बाद विद्यालय के वातावरण में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है. उनका कहना है कि अनुशासन, स्वच्छता और पढ़ाई पर ध्यान देने से स्कूल का माहौल बेहतर हुआ है.
अभिभावकों के अनुसार, विद्यालय में शिक्षा के साथ संस्कार और विद्यार्थियों की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया जा रहा है. उनका मानना है कि प्रधानाध्यापिका की मेहनत और दूरदर्शी सोच से विद्यालय की तस्वीर बदली है और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल रहा है.
शिक्षक दिवस विशेष संदेश: एक बेहतर विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होता, बल्कि वह बच्चों में अनुशासन, जिम्मेदारी, रचनात्मकता और अच्छे संस्कार विकसित करने की नींव भी तैयार करता है.
