दुबई से एक सप्ताह बाद गोपालगंज पहुंचा शिप इंजीनियर रोहन का शव, अंतिम दर्शन के दौरान फूट-फूटकर रोए परिजन

गोपालगंज के विदेशी टोला गांव निवासी शिप इंजीनियर रोहन उर्फ सोनू गुप्ता का पार्थिव शरीर दुबई से पैतृक गांव पहुंचा. एक सप्ताह बाद बेटे का शव घर पहुंचते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई. पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई.

Gopalganj News: थावे प्रखंड के विदेशी टोला गांव निवासी शिप इंजीनियर रोहन उर्फ सोनू गुप्ता का पार्थिव शरीर सोमवार को दुबई से उनके पैतृक गांव पहुंचा. एक सप्ताह बाद बेटे का शव घर पहुंचते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई. माता-पिता सहित पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, जबकि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई.

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी लोगों की भीड़

पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की सूचना मिलते ही अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए. स्थानीय मुखिया मनीष गुप्ता, ओम प्रकाश राय, आनंद उर्फ लड्डू गुप्ता, नारायण जी प्रसाद, संजय गुप्ता सहित कई जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दिवंगत को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी.

इसके बाद पूरे विधि-विधान के साथ पिपराही पुल स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया. देर शाम तक लोगों का शोक व्यक्त करने के लिए परिवार के घर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा.

13 जुलाई को होर्मुज स्ट्रेट में हमले में हुई थी मौत

रोहन उर्फ सोनू गुप्ता दुबई स्थित अल बयाह एडनौक कंपनी में शिप इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे. 13 जुलाई को अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास जहाजों की आवाजाही के दौरान हुए हमले में उनकी मौत हो गई थी.

बताया गया कि उनका जहाज सऊदी अरब की ओर से लौट रहा था. इसी दौरान हुए हमले में वे इसकी चपेट में आ गए. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है.

विदेश मंत्रालय की पहल से स्वदेश पहुंचा शव

रोहन जूता-चप्पल एवं जनरल स्टोर व्यवसायी संजय प्रसाद गुप्ता के सबसे छोटे पुत्र थे. हादसे के बाद परिजनों ने सरकार से पार्थिव शरीर भारत लाने की गुहार लगाई थी.

इस दौरान सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन, बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी तथा विधायक सुभाष सिंह ने परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया.

जिला पदाधिकारी समीर सौरभ के निर्देश पर सदर एसडीओ डॉ. प्रेरणा सिंह एवं एसडीसी अजय कुमार ने परिजनों से मुलाकात कर पूरी रिपोर्ट गृह विभाग को भेजी. इसके बाद विदेश मंत्रालय के समन्वय से रोहन का पार्थिव शरीर भारत लाया जा सका.

गांव में पसरा मातम

युवा शिप इंजीनियर की असमय मौत से पूरे विदेशी टोला गांव में मातम पसरा है. परिजनों के साथ ग्रामीणों की आंखें भी नम थीं. लोगों ने सरकार से परिवार को हरसंभव आर्थिक सहायता और सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की है.

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Author: Manoranjan upadhyay

Published by: Vivek Ranjan

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