Gopalganj News: सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति पर नजर रखने के लिए लागू ई-शिक्षाकोष व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. मिली जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग की समीक्षा में एक ही दिन यानी 25 जुलाई को 2051 शिक्षक अनुपस्थित मिले. नियमित मॉनिटरिंग और ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था होने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के अनुपस्थित मिलने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
अब सवाल यह है कि चूक आखिर कहां हो रही है—शिक्षकों की ओर से, विभागीय निगरानी में या फिर ई-शिक्षाकोष प्रणाली में? गोपालगंज जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति ई-शिक्षाकोष के माध्यम से दर्ज करायी जाती है. जिला स्तर पर प्रतिदिन इसकी निगरानी किए जाने का दावा भी किया जाता है. इसके बावजूद समीक्षा के दौरान बार-बार बड़ी संख्या में अनियमितताएं सामने आने से पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं.
पहले भी 5639 शिक्षकों से जुड़ी मिली थीं खामियां
यह पहला मौका नहीं है जब विभागीय समीक्षा में बड़े पैमाने पर कमियां सामने आयी हैं. कुछ महीने पहले हुई समीक्षा में 5639 शिक्षकों से संबंधित विभिन्न खामियां उजागर हुई थीं. उस समय भी विभाग की ओर से सुधार के निर्देश जारी किए गए थे और निगरानी व्यवस्था को तेज करने की बात कही गयी थी.
लेकिन ताजा समीक्षा में फिर हजारों शिक्षकों के अनुपस्थित मिलने से सवाल उठ रहा है कि पिछली समीक्षा के बाद व्यवस्था में कितना सुधार हुआ. यदि लगातार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हो रही है और उसकी निगरानी भी की जा रही है, तो इतनी बड़ी संख्या में अनुपस्थित शिक्षक समीक्षा के दौरान ही क्यों सामने आ रहे हैं?
ई-शिक्षाकोष और मॉनिटरिंग दोनों पर सवाल
ई-शिक्षाकोष का उद्देश्य शिक्षकों की उपस्थिति को पारदर्शी बनाना और विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन सुनिश्चित करना है. ऑनलाइन उपस्थिति के जरिये विभाग को यह पता चलना चाहिए कि किस विद्यालय में शिक्षक मौजूद हैं और कहां अनुपस्थित.
लेकिन समीक्षा में बड़ी संख्या में शिक्षकों के अनुपस्थित मिलने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं. यदि ऑनलाइन उपस्थिति की प्रतिदिन निगरानी हो रही है, तो फिर समीक्षा के बाद ही इतनी बड़ी संख्या में अनुपस्थित शिक्षक क्यों सामने आते हैं? यदि इसमें तकनीकी समस्या है, तो उसका स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं निकाला गया? और यदि मामला शिक्षकों की लापरवाही का है, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
शिक्षक दोषी या सिस्टम में ही है खामी?
शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल मॉनिटरिंग को पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रभावी माध्यम माना जाता है. लेकिन गोपालगंज में लगातार सामने आ रही रिपोर्टें इस व्यवस्था के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रही हैं.
कभी शिक्षकों की अनुपस्थिति सामने आती है, कभी विभागीय निगरानी पर सवाल उठते हैं और कभी ई-शिक्षाकोष की तकनीकी खामियों की चर्चा होती है. ऐसे में असली सवाल यह है कि 2051 शिक्षकों के अनुपस्थित मिलने के पीछे वास्तविक वजह क्या है?
जवाबदेही तय होने का इंतजार
शिक्षा विभाग की ओर से लगातार ई-गवर्नेंस और डिजिटल मॉनिटरिंग को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है. इसके बावजूद यदि समीक्षा में बार-बार बड़ी संख्या में शिक्षक अनुपस्थित मिल रहे हैं, तो व्यवस्था की कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना जरूरी है.
ताजा समीक्षा ने एक बार फिर सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है. अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में शिक्षकों की लापरवाही, तकनीकी खामी या मॉनिटरिंग में चूक में से किसे जिम्मेदार मानता है और जवाबदेही कैसे तय की जाती है.
