Gopalganj News: बिहार शिक्षा विभाग की ओर से रैशनलाइजेशन (युक्तीकरण) के तहत शुरू की गयी शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया का शिक्षक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है. 29 जुलाई से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत शिक्षकों को पांच अगस्त तक आवेदन करने का अवसर दिया गया है. हालांकि, विभाग की ओर से जारी अधिशेष (सरप्लस) शिक्षकों की सूची सामने आने के बाद कुचायकोट समेत पूरे जिले में शिक्षकों में नाराजगी बढ़ गयी है. प्राथमिक शिक्षक संघ और परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ समेत विभिन्न शिक्षक संगठनों ने सरकार और शिक्षा विभाग से प्रक्रिया पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है.
एक साल में दोबारा स्थानांतरण से महिला शिक्षिकाओं में नाराजगी
शिक्षक नेताओं का कहना है कि 15 से 20 वर्षों से एक ही क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों का दोबारा स्थानांतरण करना व्यावहारिक नहीं है. इस प्रक्रिया को लेकर सबसे अधिक नाराजगी महिला शिक्षिकाओं में है. उनका कहना है कि कई महिला शिक्षिकाओं ने 18 से 20 वर्षों तक मायके के क्षेत्र में सेवा देने के बाद पिछले वर्ष ही पति-पत्नी नीति के तहत अपने घर अथवा पति के विद्यालय के समीप स्थानांतरण कराया था.
शिक्षकों के अनुसार, अभी स्थानांतरण को एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ है और कई महिला शिक्षिकाओं के नाम दोबारा सरप्लस सूची में शामिल कर दिये गये हैं. इससे उनके सामने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ आवागमन और अन्य व्यावहारिक समस्याएं खड़ी हो गयी हैं.
दो शिक्षकों वाले स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका
शिक्षक नेता शक्ति तिवारी और सुमीत मिश्रा ने कहा कि रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया से प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है. उनका कहना है कि कई प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई के लिए महज दो शिक्षक ही उपलब्ध हैं. ऐसे में यदि इनमें से एक शिक्षक अवकाश पर रहता है या विभागीय कार्य में व्यस्त रहता है, तो विद्यालय की पूरी शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो जाती है.
शिक्षक नेताओं ने कहा कि यदि ऐसे विद्यालयों से भी शिक्षकों को सरप्लस बताकर स्थानांतरित किया गया, तो इसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर पड़ेगा.
59 रिक्तियों के मुकाबले दो हजार से अधिक शिक्षक सरप्लस होने पर सवाल
शिक्षक नेता शक्तिनाथ तिवारी ने विभागीय आंकड़ों में विसंगति का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि गोपालगंज जिले के सभी 14 प्रखंडों में कुल मिलाकर महज 59 रिक्तियां दिखाई गयी हैं, जबकि दो हजार से अधिक शिक्षकों को सरप्लस घोषित किया गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन आखिर किस आधार पर किया जायेगा.
उन्होंने विभाग से सरप्लस सूची तैयार करने के आधार और आंकड़ों को स्पष्ट करने की मांग की है, ताकि शिक्षकों के बीच बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सके.
पहले पूरी हो पदोन्नति, फिर हो स्थानांतरण की प्रक्रिया
शिक्षक संगठनों ने स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने से पहले शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है. उनका कहना है कि प्रोन्नति के बाद ही विद्यालयों में शिक्षकों के पदों और रिक्तियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
संगठनों ने विद्यालयवार छात्र संख्या, स्वीकृत पदों और विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता के आधार पर सरप्लस सूची की दोबारा समीक्षा करने की भी मांग की है. शिक्षक नेताओं का कहना है कि केवल कागजी आंकड़ों के आधार पर शिक्षकों का स्थानांतरण करने से विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की समस्या और गंभीर हो सकती है.
शुक्रवार को बैठक कर तय होगी आगे की रणनीति
शिक्षक नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि शिक्षा विभाग ने जल्द सकारात्मक पहल नहीं की, तो शिक्षक संगठन आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे. इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए शिक्षक नेताओं ने शुक्रवार को बैठक भी बुलायी है. बैठक में रैशनलाइजेशन प्रक्रिया और सरप्लस सूची के खिलाफ आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिये जाने की संभावना है.
