school inspection: कुचायकोट प्रखंड के यूपी बॉर्डर पर स्थित बथना गांव के राधाकृष्ण संस्कृत उच्च विद्यालय का डीईओ अमरेंद्र कुमार पांडेय ने गुरुवार को औचक निरीक्षण किया. उनके साथ सीओ मनोरंजन शुक्ला और बीईओ अशोक कुमार सिंह भी मौजूद थे. विद्यालय की स्थिति देखकर डीईओ ने नाराजगी जतायी और कई बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया.
निरीक्षण के दौरान विद्यालय में एक भी छात्र मौजूद नहीं मिला. प्राचार्य पुरुषोत्तम पांडेय विद्यालय में मौजूद थे. छात्रों के बारे में पूछने पर बताया गया कि उस दिन छात्र विद्यालय नहीं आये थे. एक शिक्षक का छुट्टी का आवेदन मिला, जबकि अन्य शिक्षक बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए. डीईओ ने विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति और पठन-पाठन की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया.
स्कूल की जमीन की होगी मापी
जांच के दौरान विद्यालय की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत भी सामने आयी. बताया गया कि जमीन पर कब्जे के कारण विद्यालय की चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है. इससे विद्यालय परिसर की सुरक्षा को लेकर भी समस्या बनी हुई है.
डीईओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीओ को विद्यालय की जमीन की मापी कराने और अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया. मापी के बाद यदि सरकारी या विद्यालय की जमीन पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी.
जमीन उपलब्ध हुई तो खुलेगा गुरुकुलम
निरीक्षण के दौरान विद्यालय को केंद्रीय गुरुकुलम के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. डीईओ ने कहा कि यदि पर्याप्त जमीन उपलब्ध होती है तो यहां गुरुकुलम खोलने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है.
बताया गया कि मंदिर की जमीन को भी शामिल करते हुए करीब पांच एकड़ जमीन उपलब्ध होने पर गुरुकुलम स्थापित करने का मार्ग आसान हो सकता है. इसके लिए मंदिर प्रबंधन से भी सहमति लेने की बात कही गयी.
प्रबंधन कमेटी पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान विद्यालय प्रबंधन कमेटी को लेकर भी सवाल उठे. कमेटी में कौन-कौन सदस्य हैं और उसका संचालन किस व्यवस्था के तहत हो रहा है, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं करायी जा सकी.
डीईओ ने प्राचार्य से प्रबंधन कमेटी का रजिस्टर, उपस्थिति पंजी, विद्यालय की जमीन से संबंधित रिकॉर्ड, कैशबुक समेत अन्य आवश्यक अभिलेख तलब किए. प्राचार्य ने तत्काल सभी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही और शनिवार तक उन्हें उपलब्ध कराने का समय मांगा. डीईओ ने निर्धारित समय तक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. अभिलेखों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
आपसी विवाद के कारण बदहाल होने की बात
स्थानीय स्तर पर विद्यालय की बदहाली के पीछे आपसी विवाद और प्रबंधन से जुड़े पुराने विवादों की बात भी सामने आयी. स्थानीय लोगों के अनुसार राधाकृष्ण संस्कृत उच्च विद्यालय की स्थापना बथना कुट्टी मंदिर के संत बृज बिहारी शरण वेदांती जी महाराज ने वर्ष 1933 में की थी.
स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी इस विद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा ग्रहण करते थे और यहां से पढ़ाई करने वाले कई विद्यार्थियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बनाई. समय के साथ विद्यालय की स्थिति खराब होती चली गयी, जिससे क्षेत्र के लोगों में भी नाराजगी है.
गुरुकुलम खुलने से बदल सकता है शिक्षा का माहौल
शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालय को केंद्रीय गुरुकुलम के रूप में विकसित करने की संभावना पर जोर दिया जा रहा है. यदि योजना आगे बढ़ती है तो यहां विद्यार्थियों को वेद और संस्कृत के साथ विज्ञान और अंग्रेजी की शिक्षा देने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है.
इससे भारतीय परंपरा और संस्कृति के साथ आधुनिक शिक्षा एवं कौशल विकास को भी जोड़ा जा सकेगा. विभाग की ओर से इसके लिए जमीन, प्रबंधन और अन्य आवश्यक संसाधनों की स्थिति की जांच की जा रही है.
