गोपालगंज : कुहरे के बीच वाहन चला रहे हैं, तो सतर्क व सावधान रहें, क्योंकि आपकी जरा सी चूक आपके और सामनेवाले के लिए जानलेवा हो सकती है. महानगर ही नहीं, बल्कि जिले भर में ऐसी कई जगह है, जो दुर्घटना जोन के नाम से बदनाम हो चुका है. इन स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी रख कर दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है. दिल्ली से महानगर आते वक्त सबसे पहले पाकबड़ा में प्रवेश होता है.
कुहरे में वाहन चलाते वक्त यातायात नियमों का रखें ध्यान
गोपालगंज : कुहरे के बीच वाहन चला रहे हैं, तो सतर्क व सावधान रहें, क्योंकि आपकी जरा सी चूक आपके और सामनेवाले के लिए जानलेवा हो सकती है. महानगर ही नहीं, बल्कि जिले भर में ऐसी कई जगह है, जो दुर्घटना जोन के नाम से बदनाम हो चुका है. इन स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी रख […]

यहां घुसने से पहले सतर्क हो जाएं और ये न समझें कि नेशनल हाइवे होने के कारण यह क्षेत्र सुरक्षित है. सच्चाई तो यह है कि यहां पर जरा सी चुक आपको या सामनेवाले को अस्पताल पहुंचा सकती है. महानगर के प्रवेश द्वार पर भीड़-भाड़ के साथ ही यातायात नियमों की अनदेखी हो रही है. कुछ यही हाल लाकड़ी फाजलपुर, चौधरी चरण सिंह चौक, जीरो प्लाइंट भोजपुर का भी है. यहां पर भी वाहनों की आवाजाही के दौरान अधिक सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है. मुरादाबाद डिपो व पीतलनगरी डिपो के अलावा कोहीनूर तिराहा, पंडितनगला बाइपास, जामा मसजिद पुल भी ऐसे स्थान हैं, जहां अतिरिक्त सावधानी बरत कर दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है.
सीट बेल्ट और हेलमेट बचा सकती है जान : चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट अनिवार्य है और इसे न बांधने पर दंडित किये जाने का प्रावधान है. यही नियम दोपहिया वाहनों में हेलमेट न लगाने पर लागू है. क्योंकि, हादसों के अध्ययन में यह साबित हो चुका है कि यह दोनों ही सुरक्षा उपाय हैं और हादसा होने पर चोट की गंभीरता को कम करता है. किसी भी गंभीर दुर्घटना में सीट बेल्ट बांधने व हेलमेट लगाने पर जीवन बचने की संभावना दोगुनी होती है. सीट बेल्ट दुर्घटना में टक्कर के प्रभाव को पांच फीसदी तक कम कर देती है. इसी प्रकार हेलमेट भी सिर की चोट की गंभीरता को 70 फीसदी कम करता है. शर्त यह है कि हेलमेट अच्छी क्वालिटी का आइएसआइ मार्का हो.