नहीं रहे कुष्ठ रोगियों के भगवान

फोटो 16भोरे. विजयीपुर प्रखंड के ऐतिहासिक भदसी वन में साधक बाबा बालक दास का गुरुवार की दोपहर निधन हो गया. वे 95 वर्ष के थे. बाबा बालक दास कुष्ठ रोगियों के भगवान के नाम से जाने जाते थे. वर्षों से भदसी वन में रह कर कुष्ठ रोगियों का उपचार करते थे. बाबा बालक दास का […]

फोटो 16भोरे. विजयीपुर प्रखंड के ऐतिहासिक भदसी वन में साधक बाबा बालक दास का गुरुवार की दोपहर निधन हो गया. वे 95 वर्ष के थे. बाबा बालक दास कुष्ठ रोगियों के भगवान के नाम से जाने जाते थे. वर्षों से भदसी वन में रह कर कुष्ठ रोगियों का उपचार करते थे. बाबा बालक दास का जन्म सीवान जिले के मैरवा प्रखंड में हुआ था, जो वर्षों पूर्व अपने घर को छोड़ कर असम के जंगलों साधना करने चले गये थे. वहां से लौटने के बाद उन्होंने महाभारत कालीन राजा भूरीश्रवा की तपोस्थली भदसी वन को अपना बसेरा बनाया. भदसी वन में बाबा बालक दास द्वारा कई मंदिरों का निर्माण किया गया है. साथ ही कुष्ठ आश्रम भी बाबा के द्वारा निर्मित किया गया था. रोगियों का इलाज वे भदसी जंगल की जड़ी-बूटियों से करते थे.

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