खिली धूप, लोगों ने लिया आनंद

अब पाला पड़ने की आशंका गोपालगंज : मंगलवार की दोपहर में धूप निकली. लोगों ने अपने घरों से निकल कर इसका आनंद उठाया. शाम होने के पहले ही पूरा वातावरण कुहरे में सिमट गया. कुहरे से दृश्यता शून्य हो रही है. आज न्यूनतम तापमान में दो डिग्री की वृद्धि दर्ज की गयी. मौसम विभाग के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 31, 2014 8:31 AM
अब पाला पड़ने की आशंका
गोपालगंज : मंगलवार की दोपहर में धूप निकली. लोगों ने अपने घरों से निकल कर इसका आनंद उठाया. शाम होने के पहले ही पूरा वातावरण कुहरे में सिमट गया. कुहरे से दृश्यता शून्य हो रही है. आज न्यूनतम तापमान में दो डिग्री की वृद्धि दर्ज की गयी. मौसम विभाग के अनुसार आनेवाले तीन दिनों में कुहरा गहराने के साथ पाला भी पड़ सकता है. घने कुहरे के बीच सुबह से ही दृश्यता शून्य रही. इसके चलते वाहन रेंग-रेंग कर चले. वहीं, लोग भी अपने घरों से बाहर निकलने से बचते रहे. सुबह 11 बजे के बाद धूप निकलने पर लोगों को राहत मिली.
न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री दर्ज किया गया. वहीं, अधिकतम तापमान 18.8 डिग्री रहा. शाम पांच बजे के बाद कुहरा गहराने लगा और रात होते-होते दृश्यता शून्य हो गयी. आंकड़ों में भले तापमान कुछ घटा हो, पर गलन और ठंड से मंगलवार को भी कोई राहत नहीं मिली. मौसम वैज्ञानिक डॉ एसएन पांडेय की मानें, तो विभाग ने जो पूर्वानुमान जताया है उसके अनुसार चार जनवरी तक मौसम इसी तरह रहेगा. न्यूनतम तापमान 6-7 और अधिकतम 17-20 डिसे के बीच रहेगा. कुहरे और सूरज में जोर आजमाइश जारी रहेगी.
पाले से फसलों को नुकसान : ठंड और कुहरे का असर फसलों पर दिखाई पड़ने लगा है. फसलों को पाला मार गया है. बचाव के लिए सिंचाई सर्वोत्तम उपाय है, लेकिन किसानों को पटवन के लिए पानी नहीं मिल रहा है. सब्जियों की खेती अधिक कुप्रभावित होने की आशंका है. इससे कीमतों में भी वृद्धि स्वाभाविक है.
लागत बचाने की जुगत : किसान अपनी लागत बचाने की जुगत में हैं. खरीफ में भी सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने से किसान टूट गये थे. अब रबी फसल पर उम्मीद टिकी है. रबी को पाले ने जोरदार झटका दिया है.
किसानों ने आशंका जतायी है कि महंगे खाद-बीज व कठोर श्रम पर मौसम की मार भारी पड़ सकती है. कुहरा व शीतलहर के कारण आलू, टमाटर, मिर्च, बैंगन, गोभी, पालक आदि की खेती को नुकसान पहुंचेगा. मसूर, सरसों, चना, अरहर सहित अन्य दलहनी व तिलहनी फसलों को भी काफी क्षति पहुंची है. गेहूं की फसल पर मौसम की मार का असर पड़ा है. गेहूं के पौधे की बाढ़ रु क गयी है.