हमें केवल इलाज पर नहीं, बल्कि समुदाय आधारित स्वास्थ्य सशक्तीकरण पर ध्यान देना होगा

बोधगया में आयोजित हुआ इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक्स का दो दिवसीय प्रथम एशियाई कांग्रेस व 25वां राष्ट्रीय सम्मेलन

फोटो- गया बोधगया 207- सम्मेलन का उद्घाटन करते राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां

फोटो- गया बोधगया 208- डॉ विजय जैन ऑरेशन के अवसर पर मेदांता गुरुग्राम की वरिष्ठ निदेशक डॉ नीलम मोहन को सम्मानित करते चिकित्सक

फोटो- गया बोधगया 209- सम्मेलन में मौजूद चिकित्सक

बोधगया में आयोजित हुआ इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक्स का दो दिवसीय प्रथम एशियाई कांग्रेस एवं 25वां राष्ट्रीय सम्मेलन,

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां हुए शामिल

वरीय संवाददाता, बोधगया

इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक्स, गया द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रथम एशियाई कांग्रेस व 25वां राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ शनिवार को हुआ. वैज्ञानिक सत्र का उद्घाटन आयोजन समिति के चेयरपर्सन डॉ विजय जैन, नागपुर से डॉ उदय बोधनकर, सचिव डॉ क्रांति किशोर, डॉ ऋषिकेश, डॉ शिव बचन सिंह, डॉ वीके करन के साथ देश-विदेश से पधारे विशिष्ट अतिथियों द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया. दो दिवसीय सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन शनिवार की शाम को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां की उपस्थिति में किया गया. आयोजन के मुख्य संरक्षक सह अध्यक्ष डॉ विजय जैन ने कहा कि बोधगया में सामुदायिक बाल चिकित्सा पर आधारित यह सम्मेलन अत्यंत गौरवपूर्ण अवसर है. उन्होंने कहा कि इस वैज्ञानिक कार्यक्रम का उद्देश्य एशियाई देशों विशेषकर, भारत व बिहार के बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं की सटीक पहचान कर उनके समाधान की दिशा में ठोस पहल करना है. डॉ क्रांति किशोर व डॉ ऋषिकेश कुमार ने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन सभी प्रतिनिधियों के ज्ञान को अद्यतन करने में सहायक सिद्ध होगा, जिससे समाज को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा. कार्यक्रम के तहत डॉ विजय जैन ऑरेशन के अवसर पर मेदांता गुरुग्राम की वरिष्ठ निदेशक डॉ नीलम मोहन ने अपने प्रेरक वक्तव्य में कहा कि अब समय आ गया है जब हमें केवल इलाज पर नहीं, बल्कि समुदाय आधारित स्वास्थ्य सशक्तीकरण पर ध्यान देना होगा. उन्होंने बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और स्कूल हेल्थ प्रोग्राम पर विशेष कार्य की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य शिक्षा और पोषण जागरूकता के लिए कार्य करें. उन्होंने यह भी कहा कि आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ता व शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से ही भारत सर्वाइवल से थ्राइविंग इंडिया की दिशा में अग्रसर हो सकता है. सम्मेलन में जयपुर, पटना, गाजियाबाद, वाराणसी, नेपाल, नागपुर, दिल्ली, अहमदाबाद और मुंबई सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आये बाल चिकित्सकों ने वक्ता के रूप में भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए. प्रमुख वक्ताओं में डॉ एन पी नारायण, डॉ प्रो विनोद कुमार सिंह, नेपाल से अरुण कुमार सिंह, डॉ प्रो ए के जसवाल, डॉ राकेश कुमार शर्मा, गाजियाबाद से डॉ अरुण अग्रवाल, जयपुर से डॉ आलोक गुप्ता, डॉ राजनीति प्रसाद, नागपुर से डॉ वाई पाटिल, रायपुर डॉ अनूप वर्मा एवं अन्य शामिल रहे. सम्मेलन के पहले दिन डॉ उमेश कुमार, डॉ राजेश कुमार, डॉ एनके गुप्ता, डॉ विवेकानंद, डॉ स्वर्णलता सहित मीडिया प्रभारी अमृतेश कुमार, सुधीश कुमार एवं कई अन्य शिशु रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया. सम्मेलन के दौरान सिपला सहित अन्य कई दवा कंपनियों के स्टॉल भी लगाये गये हैं.

बच्चों को मोबाइल फोन व टीवी देखने भी तय करें समय सीमा

कार्यक्रम के संरक्षक डॉ उदय बोधनकर ने बच्चों के स्क्रीन टाइम पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि तीन वर्ष तक के बच्चों को मोबाइल से पूर्णतः दूर रखना चाहिए. तीन से छह वर्ष के बच्चों को अधिकतम आधा घंटा, छह से 12 वर्ष के बच्चों को एक घंटा और 12 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को अधिकतम दो घंटे से अधिक स्क्रीन नहीं देखनी चाहिए.

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Published by: Kalendra pratap singh

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