मजदूरी बढ़ी 13%, लेकिन सफाई का बजट उछलकर हो गया 83% ज्यादा

मानसून के आगमन में अब बमुश्किल डेढ़ महीने का समय बचा है, लेकिन नगर निगम ने शहर के नाला-नालियों की सफाई का काम अब तक शुरू नहीं किया है.

गया जी. मानसून के आगमन में अब बमुश्किल डेढ़ महीने का समय बचा है, लेकिन नगर निगम ने शहर के नाला-नालियों की सफाई का काम अब तक शुरू नहीं किया है. इस लेटलतीफी के कारण पार्षदों और आम जनता को अभी से जलजमाव और बाढ़ की चिंता सताने लगी है. स्थिति यह है कि काम शुरू होना तो दूर, अब तक सफाई का अंतिम एस्टीमेट तक जारी नहीं किया जा सका है. बुधवार को हुई स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में इस भारी लापरवाही पर जमकर हो-हल्ला हुआ, और अब गुरुवार को होने वाली नगर निगम बोर्ड की बैठक में भारी हंगामे की आशंका है. इस बार नाला सफाई के एस्टीमेट में एक बड़ा घालमेल नजर आ रहा है. स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में बताया गया कि इस साल सफाई के लिए लगभग 5.88 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया गया है. जबकि, पिछले साल शहर के 320 छोटे और 18 बड़े नालों की सफाई महज 3.21 करोड़ रुपये में पूरी हो गई थी. एक ही साल में बजट में करीब पौने तीन करोड़ (लगभग 83 प्रतिशत) की वृद्धि किसी के गले नहीं उतर रही है. निगम के अधिकारी इस बेतहाशा वृद्धि के पीछे तर्क दे रहे हैं कि पिछले साल मजदूरों की दिहाड़ी 378 रुपये थी, जो अब बढ़कर 428 रुपये हो गयी है. लेकिन निगम का यह तर्क गणित की कसौटी पर टिकता ही नहीं है. मजदूरी में 50 रुपये यानी सिर्फ 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, तो फिर कुल बजट 83 प्रतिशत कैसे बढ़ सकता है? निगम सूत्रों का दबी जुबान में कहना है कि पहले छोटे नालों की सफाई निगम के लेबर ही कर देते थे, लेकिन अब मशीनरी और ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए यह पूरा खेल रचा जा रहा है.

विभागों के बीच चल रहा ब्लेम-गेम

इस लेटलतीफी के लिए निगम के विभाग एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं. स्वच्छता पदाधिकारी शुभम कुमार की दलील है कि नाला सफाई का एस्टीमेट बनाने के लिए मार्च में ही सूची के साथ इंजीनियरिंग शाखा को पत्र भेज दिया गया था. उनकी मानें तो सारी देरी इंजीनियरिंग शाखा की तरफ से ही की जा रही है. इस खींचतान का सीधा नुकसान शहर की जनता को भुगतना पड़ेगा.

2015 की बाढ़ से भी नहीं लिया सबक

निगम की यह लापरवाही शहर को 2015 जैसे हालात में धकेल सकती है. उस वक्त मनसरवा नाले की सफाई न होने के कारण शहर के कई मुहल्लों में भीषण जलजमाव हो गया था और बाढ़ जैसे हालात बन गये थे. स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निरीक्षण के लिए आना पड़ा था. उस समय नाले से अतिक्रमण हटाने का सख्त निर्देश दिया गया था, लेकिन आज तक वहां से अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है.

मेयर ने माना, समन्वय का है अभाव

इस पूरे मामले पर मेयर डॉ वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों के बीच समन्वय की भारी कमी है. उन्होंने कहा कि समन्वय के अभाव में नाला सफाई का काम अब तक शुरू नहीं हो सका है. स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में यह मुद्दा जोर-शोर से उठा है. 12 से 15 जून तक मानसून आ जायेगा, इसलिए काम अब तक शुरू हो जाना चाहिए था. इंजीनियरिंग और स्वच्छता शाखा एक-दूसरे की गलती निकालने में लगे हैं. नगर आयुक्त ने देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है.

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By PRANJAL PANDEY

PRANJAL PANDEY is a contributor at Prabhat Khabar.

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