धान की रोपनी का आधा से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उत्तर कोयल नहर परियोजना में पानी नहीं पहुंचने से गुरुआ प्रखंड क्षेत्र के किसान काफी चिंतित हैं.
बारिश पर निर्भर किसान किसी तरह धान की रोपनी कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण उन्हें फसल सूखने की चिंता सताने लगी है. किसानों का कहना है कि यदि समय पर बारिश नहीं हुई तो खेतों में लगी धान की फसल को बचाना मुश्किल हो जाएगा और क्षेत्र में सुखाड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
किसानों के अनुसार, उत्तर कोयल नहर परियोजना वर्ष 1972 से लंबित है. उस समय करोड़ों रुपये की लागत से इस परियोजना का काम शुरू किया गया था.
परियोजना के तहत 45 से अधिक छोटे-बड़े ब्रांच नहर निकाले गए हैं, लेकिन इनमें से कई की स्थिति जर्जर है और नियमित रूप से पानी नहीं पहुंच पाता है. किसानों का कहना है कि यदि उत्तर कोयल नहर परियोजना पूरी तरह चालू हो जाए और नहरों में पर्याप्त पानी पहुंचे, तो गुरुआ प्रखंड के खेतों में हरियाली नजर आएगी और किसानों को बारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
बारिश नहीं होने पर किसानों को डीजल पंप और निजी साधनों से खेतों की सिंचाई करनी पड़ती है, जिससे खेती की लागत काफी बढ़ जाती है. किसानों का कहना है कि समय पर नहर में पानी उपलब्ध होने से धान की रोपनी के साथ-साथ फसल की सिंचाई भी आसानी से हो सकेगी.
नहर चालू कराने की मांग को लेकर संघर्ष मोर्चा सक्रिय
उत्तर कोयल नहर किसान संघर्ष मोर्चा के संरक्षक एवं गुरुआ उत्तरी के जिला पार्षद बालेश्वर प्रसाद ने सरकार से उत्तर कोयल नहर परियोजना को हर हाल में चालू कराने की मांग की है.
उन्होंने कहा कि नहर में पानी आने से किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा और किसान खुशहाल होंगे. उन्होंने बताया कि नहर परियोजना को लेकर किसान संघर्ष मोर्चा लगातार आवाज उठा रहा है.
स्थानीय सांसद और विधायक से भी गुहार लगा चुके हैं किसान
औरंगाबाद के पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह, तत्कालीन विधायक स्वर्गीय सुरेंद्र प्रसाद सिन्हा, पूर्व विधायक स्वर्गीय राजीव नंदन दांगी आदि लोगों से भी किसान मिलकर इसके लिए लगातार प्रयास कर चुके हैं.
बावजूद इसके अभी तक किसानों के हित में सफलता नहीं मिली है और नहर की स्थिति यथावत है.
15 अगस्त तक सभी जगह पानी पहुंचने की उम्मीद
इस संबंध में उत्तर कोयल नहर परियोजना के मुख्य अभियंता अर्जुन प्रसाद सिंह ने बताया कि 15 अगस्त तक संभवतः सभी जगह नहर का पानी पहुंच जाएगा. इसके लिए लगातार युद्ध स्तर पर काम चल रहा है.
उन्होंने कहा कि छोटे-बड़े ब्रांच नहरों को दुरुस्त करने के लिए जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. परियोजना से जुड़े सभी कार्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत किए जा रहे हैं.
