भारतीय इतिहास में मगध क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है. एक दौर में मगध का इतिहास देश का इतिहास हुआ करता था, लेकिन आज वही मगध क्षेत्र सिंचाई और गंभीर जल संकट की समस्या से जूझ रहा है.
पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा ने मगध क्षेत्र की सिंचाई की समस्या को दूर करने के लिए उत्तर कोयल नहर परियोजना की दिशा में पहल की थी. उत्तर कोयल परियोजना की परिकल्पना झारखंड के पलामू क्षेत्र में उत्तर कोयल नदी के जल का उपयोग कर बिहार व झारखंड के विस्तृत भूभाग को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी. वर्षों तक विभिन्न कारणों से यह परियोजना अधूरी रही, जिससे लाखों किसान इसके लाभ से वंचित रहे.
परिजनों और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों के बाद भी अधूरी आस
सत्येंद्र नारायण सिन्हा के पुत्र एवं पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार ने अपने संसदीय काल के दौरान उत्तर कोयल नहर को धरातल पर उतारने का यथासंभव प्रयास किया. निखिल कुमार के नेतृत्व में टिकारी से एक शिष्टमंडल ने तत्कालीन झारखंड के राज्यपाल से भी मुलाकात की थी, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी.
गया जिले का टिकारी क्षेत्र धान, गेहूं, दलहन एवं तिलहन उत्पादन के लिए जाना जाता है. यहां की उपजाऊ भूमि पर्याप्त जल उपलब्ध होने पर उत्कृष्ट उत्पादन देने की क्षमता रखती है.
लेकिन अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और सीमित सिंचाई साधनों के कारण किसानों को हर वर्ष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कई बार धान की रोपनी समय पर नहीं हो पाती, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय दोनों प्रभावित होती हैं.
टिकारी क्षेत्र तक पानी पहुंचे तो बदलेगी कृषि की तस्वीर
यदि उत्तर कोयल नहर परियोजना का लाभ टिकारी क्षेत्र तक प्रभावी ढंग से पहुंचता है, तो यहां कृषि की तस्वीर बदल सकती है. नियमित सिंचाई से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा, वर्ष में दो से तीन फसलें लेना संभव होगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. साथ ही पशुपालन, बागवानी तथा कृषि आधारित लघु उद्योगों के विकास की भी नई संभावनाएं खुलेंगी.
कृषि समृद्ध होने से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
टिकारी क्षेत्र कृषि के साथ-साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. मां तारा नगरी केसपा, चित्तौखर, अमरपुर, रेवई, खनेटू तथा आसपास के कई गांव अपनी ऐतिहासिक विरासत और ग्रामीण संस्कृति के लिए प्रसिद्ध हैं.
कृषि समृद्ध होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, जिससे पर्यटन, स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी.
हालांकि केवल नहर का निर्माण पर्याप्त नहीं होगा. यह भी आवश्यक है कि नहरों का समय पर रखरखाव हो, अंतिम छोर (टेल एंड) तक पानी पहुंचे, जल प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए तथा किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाए. जल का विवेकपूर्ण उपयोग ही इस परियोजना की दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करेगा.
टिकारी के किसानों के लिए जीवनदायिनी बन सकती है परियोजना
उत्तर कोयल नहर परियोजना दक्षिण बिहार, विशेषकर टिकारी क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी पहल सिद्ध हो सकती है. यदि इसे समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पूरा कर किसानों तक इसका वास्तविक लाभ पहुंचाया जाए, तो यह परियोजना केवल खेतों को ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, रोजगार और ग्रामीण जीवन को नई दिशा देगी.
प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष सत्येंद्र नारायण ने कहा कि उत्तर कोयल नहर का पानी टिकारी प्रखंड में अभी तक नहीं आया है. सोन कैनाल 252 आरडी का पानी उत्तर कोयल रतनी वितरणी नहर में आ रहा है. यह परियोजना टिकारी के किसानों के सपनों को साकार करने वाली जीवनदायिनी धारा बन सकती है.
