ब्लैकमेलिंग का शिकार था जवान, बेटों का दावा-महिला ने 20 लाख ऐंठे, डेढ़ बीघा जमीन बिकवाई

गया एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के 56 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल मुकेश कुमार सिंह की हरियाणा पुलिस की कस्टडी में हुई मौत के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.

रोशन कुमार, गया जी. गया एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के 56 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल मुकेश कुमार सिंह की हरियाणा पुलिस की कस्टडी में हुई मौत के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. मृतक के परिजनों ने इसे महज कस्टोडियल डेथ नहीं, बल्कि एक ब्लैकमेलिंग और साजिश के तहत की गयी हत्या करार दिया है. घटना की सूचना मिलते ही गया पहुंचे मृतक के बेटे दुर्गेश कुमार, नीलेश कुमार और पत्नी रीमा देवी ने पूरी गिरफ्तारी प्रक्रिया और मामले की पृष्ठभूमि पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं.

ब्लैकमेलिंग का जाल: डेढ़ बीघा जमीन बिकी, 20 लाख दिये

मृतक के बेटों ने बताया कि वर्ष 2023 में हरियाणा में पोस्टिंग के दौरान उनके पिता एक शातिर महिला के जाल में फंस गये थे. उस महिला ने उनके खिलाफ हरियाणा के सेक्टर-6 (बहादुरगढ़) थाने में धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज करायी थी. आरोप है कि केस का डर दिखाकर वह महिला लगातार उन्हें ब्लैकमेल कर रही थी. उसकी मांगें पूरी करने के लिए मुकेश कुमार सिंह ने वैशाली जिले के जन्दाहा थाना अंतर्गत (मुकुंदपुर-गोविंदपुर) अपने पैतृक गांव की करीब डेढ़ बीघा जमीन बेच दी और अब तक उस महिला को 15 से 20 लाख रुपये दे चुके थे. जब मुकेश रिटायरमेंट के करीब पहुंच गये और उन्होंने पैसे देना बंद कर दिया, तो महिला ने हरियाणा पुलिस को हथियार बनाकर इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया.

जमानत के बावजूद आधी रात को गिरफ्तारी क्यों?

परिजनों का सबसे बड़ा और तकनीकी सवाल यह है कि जब जांच पूरी हो चुकी थी, तो गिरफ्तारी क्यों की गयी? बेटों का स्पष्ट दावा है कि इस केस में उनके पिता को पहले ही न्यायालय से बेल मिल चुकी थी. उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया था और चार्जशीट भी तैयार हो गयी थी, जिसे पुलिस ने जानबूझकर कोर्ट में जमा नहीं किया. ऐसे में, जब हिरासत का कोई कानूनी औचित्य ही नहीं था, तो हरियाणा पुलिस के अधिकारियों (एसीपी प्रदीप कुमार, एएसआई सुधीर पाल, अजीत कुमार और अरविंद कुमार) ने सीआइएसएफ के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर आधी रात को बैरक से अवैध गिरफ्तारी क्यों की?

वकील की 15 कॉल्स इग्नोर, नहीं दिया कोई मेमो

इस गिरफ्तारी में पुलिस मैन्युअल की धज्जियां उड़ाई गयीं. परिजनों के अनुसार, पुलिस ने न तो कोई अरेस्ट मेमो बनाया, न कोई नोटिस दिया और न ही परिवार को आधिकारिक सूचना दी. जब परिजनों को भनक लगी, तो उनके वकील कुमार गौरव ने सीआइएसएफ और हरियाणा पुलिस के अधिकारियों से संपर्क साधा. वकील ने स्पष्ट किया कि कानूनी रूप से यह गिरफ्तारी अवैध है, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी. वकील ने 15-16 बार कॉल की, जिसे जानबूझकर इग्नोर किया गया.

हत्या का सीधा आरोप

परिजनों का कहना है कि मुकेश कुमार सिंह गिरफ्तारी के वक्त पूरी तरह स्वस्थ थे. पुलिस कस्टडी में अत्यंत संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत यह साबित करती है कि महिला और पुलिस अधिकारियों ने आपसी साजिश रचकर कानून को ताक पर रखते हुए उनकी हत्या की है. परिजनों ने अब न्याय की गुहार लगाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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Published by: Pranjal pandey

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