रोशनी का महापर्व दीपावली में डेढ़ करोड़ मिट्टी के दीये से रोशन होगा शहर

बाजार में बढ़ी चहल पहल, खरीदारी को लेकर बाजार में उमड़ रहे लोग

गया. रोशनी का महापर्व दीपावली इस बार डेढ़ करोड़ मिट्टी के दीयों से शहर को रोशन करेगा. इस त्योहार को लेकर बाजार में पूरे दिन चहल-पहल बनी रही. खरीदारी को लेकर लोगों की भीड़ बाजार में उमड़ रही है. इस बार 18 अक्तूबर को धनतेरस के साथ दीपावली का आगाज हो रहा है, जबकि 20 अक्तूबर को दीपावली यानी लक्ष्मी पूजा मनायी जायेगी. दीपावली की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, बाजार की रौनक बढ़ती जा रही है. दीये, कलश, पूजन सामग्री, फल, मिठाई, लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्तियां और दीपावली से जुड़े अन्य सामान की दुकानों की संख्या बढ़ गई है. छोटे कारोबारियों ने मुहल्लों में सड़क किनारे सैकड़ों अस्थायी दुकानें लगा रखी हैं, जहां लोग अपनी आर्थिक क्षमता और जरूरत के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं. ग्राहकों की भीड़ बढ़ने से चौक, केपी रोड, जीबी रोड, टिकारी रोड, लहरिया टोला, धामी टोला, रमना रोड, बजाजा रोड, राजेंद्र आश्रम, बाटा मोड़, चांदचौरा, दुर्गा स्थान, एपी कॉलोनी और चौक सहित अधिकतर व्यावसायिक क्षेत्रों में बुधवार को पूरे दिन रुक-रुक कर जाम लगा रहा. दोपहर के बाद विशेष रूप से केपी रोड, चौक और धामी टोला मुहल्ले में पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा था. वहीं, शहर के अधिकांश मुहल्लों के घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में रंग-बिरंगी बत्तियों से रोशनी फैलनी शुरू हो गयी है. कई पूजा समितियां पंडाल बनाकर मां लक्ष्मी, मां काली और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित कर रही हैं. पंडालों को सजाया जा रहा है, जबकि मूर्तिकार दिन-रात मां लक्ष्मी, मां काली, गणेश जी और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं.

मिट्टी के दीये बनाने में जुटा डेढ़ सौ प्रजापति परिवार

दीपावली पर इस बार डेढ़ करोड़ से अधिक मिट्टी के दीयों से शहर रोशन होगा. कुम्हार समाज के करीब 150 परिवारों से जुड़े लगभग 300 लोग दो माह से दीये बनाने में लगे हुए हैं. माड़नपुर बाइपास के सूरजदेव प्रजापति ने बताया कि दीपावली से पहले तक एक परिवार औसतन करीब एक लाख दीये बना लेता है. कुल मिलाकर इन परिवारों द्वारा इस बार डेढ़ करोड़ से अधिक दीये बनाये जायेंगे. शहर के उत्तरी क्षेत्र में करीब 30, दक्षिणी क्षेत्र में 20, पूर्वी क्षेत्र में 40, पश्चिमी क्षेत्र में 25 और गोदावरी सहित मध्य क्षेत्र में करीब 35 प्रजापति परिवारों के लोग दीये बनाने का काम कर रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा प्राचीन है. कुम्हार जाति से जुड़े अधिकांश परिवार इस पुश्तैनी कला से प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से जुड़े हैं. थोक बाजार में सबसे छोटी दीये 600 रुपये प्रति हजार, बड़ी 1000 रुपये प्रति हजार, मध्यम 2500 रुपये प्रति हजार और सबसे बड़ी दीये 500 रुपये प्रति सैकड़ा बिक रही हैं.

25% तक महंगे हुए लक्ष्मी-गणेश जी की छोटी मूर्तियां

जीएसटी दरों में कटौती के बावजूद दीपावली पूजा से जुड़े अधिकांश सामानों के दाम बढ़ते जा रहे हैं. पिछले वर्ष की तुलना में इस बार लक्ष्मी-गणेश जी की छोटी मूर्तियों के दाम 25 प्रतिशत तक बढ़ गये हैं. थोक बाजार में चुनार की मूर्तियां 20 से 80 रुपये प्रति जोड़ी बिक रही हैं, जबकि बंगाल व फैंसी मूर्तियां 400 से 2,500 रुपये प्रति जोड़ी बिक रही हैं. दीपावली से जुड़े अन्य सामान जैसे कपड़े, पूजन सामग्री, फल, मिठाई, धान का लावा, भूंजा, झरूई लड्डू, डेकोरेशन और एलईडी लाइट के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है. इसके बावजूद लोगों की आस्था और उत्साह कम नहीं हुआ है. कारोबारी मुन्ना पंडा, राजेश कुमार और अरुण कुमार गुप्ता के अनुसार महंगाई और बिहार विधानसभा चुनाव के दौर के बावजूद इस बार दीपावली पर सभी प्रकार के कारोबार काफी अच्छा चल रहा है.

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By NIRAJ KUMAR

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