Gaya Ji Paperless Registration अवर निबंधन कार्यालय शेरघाटी में तीन अगस्त से शुरू हुई पेपरलेस निबंधन व्यवस्था को लेकर गुरुवार को डीड राइटरों (कातिबों) ने कार्य बहिष्कार किया. करीब 65 कातिबों के कार्य से अलग रहने के कारण निबंधन प्रक्रिया प्रभावित हुई. कातिबों का कहना है कि नई व्यवस्था को लागू करने से पहले पर्याप्त प्रशिक्षण और लोगों के बीच जागरूकता की जरूरत थी.
डीड राइटर संघ की आपत्ति और पारंपरिक भूमिका का संकट
डीड राइटर संघ के अध्यक्ष उपेंद्र प्रसाद, वरिष्ठ डीड राइटर गणपति यादव, सचिव मृत्युंजय कुमार, सदस्य देवनंदन प्रसाद यादव व केदार प्रसाद ने कहा कि वे डिजिटल निबंधन व्यवस्था के विरोध में नहीं हैं. उनकी आपत्ति इस बात को लेकर है कि नई व्यवस्था में कातिबों की पारंपरिक भूमिका सीमित हो गई है.
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इससे लंबे समय से इस काम से जुड़े लोगों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न होने की आशंका है. उन्होंने दस्तावेज तैयार कराने की पुरानी सुविधा को भी जारी रखने की मांग की.
डिजिटल दस्तावेजों को लेकर लोगों में संशय
डीड राइटर बलेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि पेपरलेस निबंधन के बाद मिलने वाले डिजिटल दस्तावेजों को लेकर भी लोगों में कई तरह के संशय हैं. खासकर बैंक लोन आदि के लिए दस्तावेज की स्वीकार्यता को लेकर लोग जानकारी चाहते हैं.
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अवर निबंधन पदाधिकारी का पक्ष और स्पष्टीकरण
इधर, अवर निबंधन पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि पेपरलेस निबंधन सरकार के निर्देश पर लागू किया गया है. कातिबों को सेवा प्रदाता के रूप में लाइसेंस दिया जा रहा है और वे पूर्व की तरह डीड का मजमून तैयार कर पोर्टल पर प्रविष्टि कर सकते हैं.
कार्यालय में सहायता डेस्क और प्रशासनिक तैयारी
कार्यालय में ‘मे आई हेल्प यू’ डेस्क बनाया गया है, जहां लोगों को ऑनलाइन आवेदन से लेकर अपॉइंटमेंट और निबंधन की प्रक्रिया में सहायता दी जा रही है. उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ने के साथ व्यवस्था की रफ्तार भी तेज होगी.
