शेरघाटी विधानसभा : त्रिकोणीय मुकाबले के आसार, चुनाव मैदान में 14 उम्मीदवार

एनडीए बनाम राजद बनाम जन सुराज बड़ा संघर्ष की उम्मीद

एनडीए बनाम राजद बनाम जन सुराज बड़ा संघर्ष की उम्मीद

प्रतिनिधि, शेरघाटी.

शेरघाटी सीट पर चुनावी जंग बेहद रोचक हो चुकी है. नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होते ही अब 14 प्रत्याशी मैदान में रह गये हैं. प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न मिलने के साथ ही प्रचार अभियान जोर पकड़ने लगा है. ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक सभी उम्मीदवार अपने-अपने तरीके से जनता तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, मतदाता अभी खुलकर किसी उम्मीदवार के पक्ष में रुझान प्रकट नहीं कर रहे हैं, लेकिन प्रत्याशियों द्वारा जनसंपर्क के दौरान उनकी राय का अंदाजा लगाने की कोशिश लगातार की जा रही है. शेरघाटी विधानसभा क्षेत्र में इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के संकेत मिल रहे हैं. एनडीए ने लोजपा (रा) के उदय कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है. स्थानीय समुदाय का एक वर्ग इसे पैराशूट उम्मीदवारी करार दे रहे है. कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्थानीय नेताओं को नज़रंदाज कर बाहर से प्रत्याशी थोप दिया गया है. इसी कारण लोजपा के कद्दावर कार्यकर्ता कृष्णा यादव टिकट न मिलने से नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. यह बगावत एनडीए के लिए सिरदर्द बन सकती है. इधर, राजद ने स्थानीय कार्यकर्ता पर भरोसा जताते हुए अपने उम्मीदवार को टिकट दिया है. मगर पार्टी के कुछ नेता संगठन की कार्यशैली से नाखुश हैं. इसी रोष में राजद से जुड़े रहे नेता सुरेंद्र सुमन उर्फ भगत यादव ने भी निर्दलीय चुनावी मैदान में है. उन्होंने पार्टी के क्रियाकलाप से नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है. इससे राजद की समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है.

जन सुराज ने भी झोंकी ताकत

जनसुराज पार्टी पहली बार इस सीट पर मजबूती से ताल ठोक रही है. नगर पर्षद की अध्यक्ष गीता देवी के पुत्र पवन किशोर को उम्मीदवार बनाये जाने के बाद पार्टी ने चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है. पवन किशोर की स्थानीय स्तर पर पकड़, युवाओं में लोकप्रियता और परिवार का राजनीतिक प्रभाव उन्हें बड़े गठबंधनों के सामने चुनौतीपूर्ण विकल्प बना रहा है. उनसे जुड़े कार्यकर्ता डिजिटल और जमीनी दोनों स्तर पर प्रचार को आगे बढ़ा रहे हैं.

छोटे दल और निर्दलीय भी खेल सकते हैं महत्वपूर्ण भूमिका

चुनावी मैदान में बसपा के शैलेश कुमार मिश्रा, मौलिक अधिकार पार्टी के करण राज, समाजवादी लोक परिषद के पंकज कुमार मिश्र, एआइएमआइएम के शाने अली खान और स्वराज पार्टी (लोकतांत्रिक) के संतोष ठाकुर भी सक्रिय हैं. इनके अलावा चंद्रदेव कुमार यादव, मुकेश कुमार यादव, राजीव कुमार, शबीना प्रवीण, सरजू दास जी महाराज और सुरेंद्र कुमार सुमन जैसे निर्दलीय उम्मीदवार भी कड़े मुकाबले को और पेचीदा बना रहे हैं. मल्टी-कॉर्नर मुकाबले में वोटों का बिखराव किसी भी बड़े प्रत्याशी के लिए खतरे का संकेत है.

मतदाता शांत, प्रत्याशी परेशान

फिलहाल मतदाता चुप हैं और अपने पत्ते नहीं खोल रहे. जातीय समीकरणों के साथ-साथ विकास, रोजगार और स्थानीय नेतृत्व की बात लोग अपने मन में तौल रहे हैं. प्रत्याशियों के लिए चुनौती है कि वे इस मौन बहुमत को अपने पाले में कैसे करें. धीरे धीरे प्रचार प्रसार और तेज होने वाला है जिससे पूरा क्षेत्र इस प्रतिष्ठित सीट के परिणाम का इंतजार कर रहा है. 11 नवंबर को वोट पड़ेंगे और तभी तय होगा कि शेरघाटी की कमान किसके हाथ जाती है.

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Author: Roshan Kumar

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