पितृपक्ष मेला 2026 के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा मगध क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं से नई पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर ‘हमर मगध’ सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया.
इस गरिमामयी कार्यक्रम में मगध के इतिहास, शिक्षा, संस्कार, संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा, कला, साहित्य, संगीत और मगही भाषा सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर देश-विदेश से आए विद्वानों एवं विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए.
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के मंच पर आगमन, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रगान और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया. इसके बाद अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत हुआ और विषय प्रवेश के साथ विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने अपने विचार रखे.
विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने रखे अपने विचार
- मगध का इतिहास एवं विरासत: इस विषय पर बोलते हुए डॉ. मनीष सिन्हा और प्रो. सुधांशु झा ने मगध की प्राचीन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला.
- मगध की शिक्षा, संस्कार एवं संस्कृति: इस सत्र में डॉ. राम कृष्ण मिश्र ने मगध की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों पर अपने विचार रखे.
- मगध की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि: स्वामी वेंकटेश्वरानाचार्य जी महाराज ने मगध की आध्यात्मिक विरासत और उसकी विशिष्ट पहचान पर गहरी चर्चा की.
- मगध की कला, साहित्य एवं संगीत: श्री (पं.) राजेन्द्र सिजुआर, प्रो. (डॉ.) के.के. नारायण और डॉ. राकेश कुमार सिन्हा (रवि) ने मगध की कला, साहित्य और सांगीतिक परंपरा के विभिन्न आयामों को रेखांकित किया.
- मगध की भाषा एवं इसका स्वाद: डॉ. सच्चिदानंद प्रेमी ने मगही भाषा की अनूठी विशेषताओं, उसकी मिठास और लोकजीवन से उसके गहरे जुड़ाव पर अपने विचार व्यक्त किए.
इस सेमिनार में युवाओं की सक्रिय सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जहां चयनित पांच छात्र-छात्राओं ने निर्धारित विषयों पर अपने ओजस्वी विचार प्रस्तुत किए.
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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीवंत हुई लोक विरासत
सेमिनार के पश्चात एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने अपनी कला से समां बांध दिया.
संगीत शिक्षक आशुतोष द्वारा गायन, गया के कलाकारों द्वारा बिहार लोक नृत्य, जगजीत रौशन द्वारा गायन, जीडी गोयनका स्कूल द्वारा मगध पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम और गुरुकुल संगीत विद्यालय द्वारा मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया गया. इन प्रस्तुतियों के माध्यम से मगध और बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति को बेहद जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया.
'सेवक के रूप में हमरा ई क्षेत्र के सेवा करे के मौका मिलल है' - डीएम
जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने ठेठ मगही भाषा में अपना संबोधन देते हुए कहा कि आज "हम्मर मगध" कार्यक्रम में विद्वान लोग पधारल हथे. आज मन गदगद हे कि मगध के धरती पर आके मगध के संस्कार आउ संस्कृति, मगही भाषा आउर एकर विकास पर बात करे के मौका मिलल है. ई हमर सौभाग्य है कि एगो सेवक के रूप में हमरा ई क्षेत्र के सेवा करे के मौका मिलल है.
उन्होंने आगे कहा कि मगध के इतिहास स्वर्णिम रहल है. पाटलिपुत्र के वैभव आ नालंदा के ज्ञान के प्रकास से पूरा दुनिया जगमगायल रहल हल. आज भी ई माटी में बुद्ध और महावीर के शांति और अहिंसा के संदेश गूंज है. मगही हमर पहचान है, हमर संस्कार है. एकर मिठगर बोली में केतना रागिनी आउ लोकगीत समायल है, जे दिल के छू ले है.
डीएम ने जोर देते हुए कहा कि अगर इहे लगन से हमनी काम करब, त मगही भाषा के मान-सम्मान बहुत बढ़त. मगही-शिक्षा पर जोर देके फिर से नालंदा के जगावल जाए के जरूरत हे. ई क्षेत्र में नया आयाम स्थापित करल जायत और युवा शक्ति के आगे बढ़ा के भाषा के विकास के अवसर पैदा कयल जायत. भाषा के संवृद्ध होबे से राष्ट्र समृद्ध होव है.
बिहार गीत के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों और सहयोगी कलाकारों को सम्मानित करते हुए प्रशस्ति-पत्र वितरित किए गए. अंत में 'बिहार गीत' की भव्य प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ. इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना रहा.
