Magadh University Spot Admission : मगध विश्वविद्यालय ने स्नातक सत्र 2026-30 में दाखिला लेने वाले छात्रों को एक बड़ी राहत दी है. विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू ने 17 नव स्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों और सभी संबद्धता प्राप्त कॉलेजों के प्राचार्यों को ऑन स्पॉट नामांकन के लिए अधिकृत कर दिया है. इससे छात्रों को बिना किसी परेशानी के एडमिशन का एक और शानदार अवसर मिल गया है.
रिक्त सीटों पर होगा सीधा नामांकन
डीएसडब्ल्यू द्वारा जारी सूचना के अनुसार मेरिट लिस्ट से ऑनलाइन नामांकन के बाद बची हुई स्वीकृत सीटों पर सीधे एडमिशन लिया जाएगा. इसके लिए विश्वविद्यालय ने प्राचार्यों को रिक्त सीटों के विरुद्ध ऑन स्पॉट नामांकन की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी है. इस अहम फैसले से उन छात्रों को फायदा होगा जिनका नाम कट-ऑफ या मेरिट लिस्ट में नहीं आ पाया था.
आवेदन से वंचित छात्रों को भी मिला मौका
इस नई नामांकन प्रक्रिया की सबसे अच्छी बात यह है कि ऑनलाइन आवेदन से वंचित छात्र भी इसका पूरा लाभ उठा सकते हैं. ऐसे छात्र विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित आवेदन शुल्क सीधे जमा करके अपना नामांकन कॉलेज में जाकर सुनिश्चित कर सकते हैं. प्राचार्यों को इन छात्रों का भी एडमिशन लेने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है.
30 जुलाई तक चलेगी नामांकन प्रक्रिया
डीएसडब्ल्यू ने सभी प्राचार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर इस कार्य को पूरा करने का आदेश दिया है. आधिकारिक सूचना के अनुसार यह ऑन स्पॉट नामांकन प्रक्रिया 22 जुलाई से शुरू होकर 30 जुलाई तक संचालित की जाएगी. छात्रों को इसी निर्धारित अवधि के बीच संबंधित कॉलेजों में जाकर अपनी एडमिशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
एक अगस्त तक जमा करनी होगी सूची
सभी 17 नव स्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों को नामांकित छात्रों की सूची तैयार करने का सख्त निर्देश मिला है. उन्हें यह पूरी सूची पेन ड्राइव और एक्सेल शीट में तैयार करके एक अगस्त तक मगध यूनिवर्सिटी के डीएसडब्ल्यू कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी. इससे विश्वविद्यालय के पास सभी नये छात्रों का सटीक डाटा उपलब्ध हो सकेगा.
प्राचार्यों पर तय की गई बड़ी जिम्मेदारी
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है. डीएसडब्ल्यू ने स्पष्ट किया है कि एक अगस्त के बाद ऑन स्पॉट नामांकित छात्रों का वैलिडेशन किसी भी हाल में नहीं हो पाएगा. यदि ऐसा होता है तो छात्रों के भविष्य और इस चूक की पूरी जिम्मेदारी संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों की ही होगी.
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