विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन का विरोध, मगध विवि सीनेट सदस्य ने बताया उच्च शिक्षा के लिए आत्मघाती

मगध विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य डॉ. रूपेश कुमार ने बिहार सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने इसे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और स्वायत्तता के लिए खतरा बताया है.

Magadh University Senate Member : शिक्षा प्रगति का वाहक होता है. कोई भी राज्य अथवा देश तब तक प्रगति की राह पर अग्रसर नहीं हो सकता जब तक कि शिक्षा की पुख्ता व्यवस्था न हो. इसके लिए आवश्यक है कि उच्च शिक्षा के विकास के लिए शोध कार्यों को गति प्रदान की जाए.

महाविद्यालय और विश्वविद्यालय ऐसे स्वायत्त संस्थान हैं जो शोध-कार्यों को गति प्रदान करते हैं, खासकर विश्वविद्यालय. विश्वविद्यालयों की स्थापना ही शोध-कार्यों को क्रियान्वित करने के लिए की गई है.

विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं अपितु अनुसंधान के प्रमुख केंद्र हैं. महाविद्यालय और विश्वविद्यालय अपने इस महत्ती कार्य को निर्बाध रूप से कर सकें, इसके लिए इनकी स्वायत्तता की रक्षा जरूरी है.

अधिनियम में संशोधन पर चिंता और आपत्तियां

लेकिन, मीडिया के माध्यम से मालूम हुआ है कि बिहार सरकार विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन कर अधिकारियों के माध्यम से उसपर अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहती है, जो उच्च शिक्षा के हित में नहीं है. उक्त बातें मगध विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य डॉ. रूपेश कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कही हैं.

उन्होंने कहा कि डिग्री कॉलेज को राज्यपाल सह कुलाधिपति के नियंत्रण से अलग कर स्कूली शिक्षा के तर्ज पर अधिकारियों को सौंपना उच्च शिक्षा के लिए आत्मघाती कदम होगा.

इतना ही नहीं, संभावित संशोधित अधिनियम में डिग्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नहीं बन पाएंगे, अर्थात वे एसोसिएट प्रोफेसर तक ही सिमट कर रह जाएंगे, जो उचित नहीं है, क्योंकि इससे शोध-कार्य प्रभावित होंगे.

राजनीतिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध और लोकतंत्र पर असर

सीनेट सदस्य डॉ. कुमार ने कहा कि और तो और, महाविद्यालय/विश्वविद्यालय के शिक्षकों को पद पर रहते हुए चुनाव लड़ने की जो राजनीतिक स्वतंत्रता प्रदान की गई थी, उसे भी प्रतिबंधित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है.

Also Read : भोजपुर का बाबा लंगटनाथ धाम: जहां शिव पूजा से पूरी होती हैं भक्तों की मनोकामनाएं, 5 तस्वीरों में जानिए कहानी

यह कदम परोक्ष रूप से लोकतंत्र के मंदिर में प्रबुद्ध और विद्वान लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने वाला है, जो लोकतंत्र के लिए किसी भी रूप में हितकर नहीं है. इसकी जितनी आलोचना की जाए, वह कम है.

सरकार से विचार-विमर्श करने की अपील

अतः सरकार को संभावित संशोधन करने से पूर्व शिक्षाविदों, प्रोफेसरों आदि से गंभीरतापूर्वक विचार-विमर्श करना चाहिए और तब कोई ठोस निर्णय लेना चाहिए ताकि उच्च शिक्षा की मर्यादा, गरिमा और गुणवत्ता बनी रहे, उसे ठेस न पहुंचे.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Kalendra pratap singh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >