Magadh Medical Hospital : मगध मेडिकल अस्पताल के आर्थो विभाग में एक माह से अधिक समय से ऑपरेशन की संख्या में काफी गिरावट आयी है. दो माह पहले की स्थिति देखी जाये, तो यहां हर दिन 10 मरीजों का ऑपरेशन आसानी से हो जा रहा था. पुराना ओटी में मरम्मत का काम करीब डेढ़ माह से चल रहा है. यहां पर ऑपरेशन बंद हो गया है.
आर्थो के मरीजों का ऑपरेशन अब ट्रामा सेंटर के ओटी में किया जा रहा है. यहां संसाधन की कमी के चलते महज पांच-छह मरीजों का ही ऑपरेशन हो पा रहा है. पुराना बड़ा ओटी अंदर से ठीक कर लिया गया है.
लेकिन, गेट नहीं लगाया गया है. इसके साथ ही अंदर के छोटा ओटी में काम तक शुरू नहीं किया गया है. अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, कई बार विभागाध्यक्ष ने ओटी ठीक करने के लिए कई बार अधीक्षक को पत्र दे चुके हैं.
काम करने के लिए हर दिन होता है पैरवी
स्थानीय जनप्रतिनिधि व अधिकारी की ओर से आर्थो में ऑपरेशन जल्द करने का दबाव यहां के डॉक्टरों पर रहता है. अस्पताल सूत्रों का कहना है कि सांसद, विधायक, अधिकारी का फोन इलाज करने को लेकर यहां पहुंचता है.
संसाधन की कमी के कारण कुछ जगहों पर काम करने में यहां के लाचार दिखते हैं. प्रमंडल का सबसे बड़ा अस्पताल होने के चलते यहां पर उक्त विभाग के काफी मरीज पहुंचते हैं. यहां बेड हर वक्त फुल ही मिलता है. बेड के लिए भी यहां पैरवी लगाना पड़ता है.
क्या कहते हैं विभागाध्यक्ष
आर्थो के विभागाध्यक्ष डॉ ओम प्रकाश ने बताया कि करीब डेढ माह से पुराना ओटी को बनाने का काम किया जा रहा है. अब काम पूरा नहीं हो सका है. हर दिन पहले यहां पुराना ओटी में छह-सात व ट्रामा सेंटर के ओटी तीन-चार मरीजों का ऑपरेशन होता था. फिलहाल स्थिति यह है कि किसी तरह से पांच ऑपरेशन ही यहां हो पा रहा है.
यहां का मशीन ठीक नहीं होने के चलते बहुत ध्यान लगाकर टूटे हुए जगह का स्क्रिन पर देखना पड़ता है. उन्होंने कहा कि संसाधन समय पर मिलने के बाद यहां एक भी पेंडिंग केस नहीं रहेगा. अस्पताल प्रशासन की ओर से जितना संसाधन उपलब्ध होगा उसके अनुरूप काम करना पड़ रहा है.
क्या कहते हैं उपाधीक्षक
मगध मेडिकल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ पीके अग्रवाल ने बताया कि आर्थो ओटी ठीक करने का काम बीएमएसआइसीएल की एजेंसी को दिया गया है. उन्हें अब तक जानकारी नहीं दी गयी है कि कब तक काम पूरा हो जायेगा.
फिलहाल ट्रामा सेंटर के ओटी में ही ऑपरेशन हो पा रहा है. विभाग से मांगने पर हर तरह के संसाधन को समय पर उपलब्ध कराया जाता है. मरीजों को परेशानी नहीं हो इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है.
