गया इस्कॉन मंदिर में भक्ति का सैलाब, जन्माष्टमी पर भगवान की झांकी और 108 भोग ने मोहा मन

गया जी के इस्कॉन मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ. श्रद्धालुओं ने मंगल आरती, महाभिषेक, हरिनाम संकीर्तन और भव्य झांकियों का आनंद लिया. मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया गया था.

Gaya ISKCON Temple Janmashtami : भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य दिवस श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का भव्य महोत्सव इस्कॉन में उत्साह व भक्ति वातावरण में संपन्न हुआ. जन्माष्टमी के अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन, हरिनाम संकीर्तन, श्रीकृष्ण कथा, महाभिषेक एवं महाआरती में भाग लिया.

मंगल आरती से शुभारंभ और पंचामृत से किया गया महाभिषेक

जन्माष्टमी के अवसर पर सुबह 4:30 बजे मंगल आरती से कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ. इसके बाद मंत्र ध्यान, गुरु पूजा एवं श्रीकृष्ण कथा सहित दिनभर विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किये गये. रात में भगवान श्रीकृष्ण का भव्य महाभिषेक किया गया.

भगवान के दर्शन के लिए आते जाते श्रद्धालु

पंचगव्य, पंचामृत, विभिन्न फलों के रस, तीर्थ जल, गुलाब जल, चंदन सहित अन्य पवित्र द्रव्यों से भगवान का अभिषेक किया गया. रात 11:30 बजे भगवान श्रीकृष्ण को 108 भोग अर्पित किये गये तथा रात 12 बजे महाआरती के साथ भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्सव मनाया गया.

पांच भव्य झांकियां और राधारमण जी के दर्शन रहे आकर्षण का केंद्र

इस मौके पर दो झूला झांकियों एवं तीन मंदिर झांकियों सहित पांच भव्य झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं. साथ ही वृंदावन वाले श्री राधारमण जी के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रही. इस मौके पर मंदिर परिसर को फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी एवं रंगोली से भव्य रूप से सजाया गया है.

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स्वयंसेवकों ने संभाली व्यवस्था की कमान, प्रशासन का मिला सहयोग

जन्माष्टमी महोत्सव को व्यवस्थित बनाने में काफी संख्या में भक्तों एवं स्वयंसेवकों ने विभिन्न सेवाओं में योगदान दिया. दर्शन व्यवस्था, कतार प्रबंधन, प्रसाद वितरण, सुरक्षा सहयोग, यातायात प्रबंधन, चिकित्सा सहायता, स्वच्छता एवं अन्य विभागों के स्वयंसेवकों ने पूरे उत्साह के साथ सेवा की.

सजा इस्कॉन मंदिर

इस्कॉन मंदिर अध्यक्ष जगदीश श्याम दास ने जन्माष्टमी महोत्सव के सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सभी श्रद्धालुओं, भक्तों, स्वयंसेवकों तथा जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि प्रशासन के सहयोग से श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को बेहतर ढंग से संभालने में काफी सहायता मिली.

पांच सितंबर को मनाया जाएगा नंदोत्सव एवं श्रील प्रभुपाद का आविर्भाव दिवस

मंदिर अध्यक्ष ने बताया कि पांच सितंबर को नंदोत्सव एवं श्रील प्रभुपाद आविर्भाव दिवस मनाया जायेगा. दोपहर 12 बजे पुष्पांजलि, भोग एवं आरती का आयोजन होगा. शाम चार बजे से आठ बजे तक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे, जिसमें हरिनाम संकीर्तन, सांस्कृतिक नृत्य, नाटक एवं श्रील प्रभुपाद की महिमा का गुणगान प्रमुख आकर्षण होगा. साथ ही भंडारे का भी आयोजन होगा.

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By नीरज कुमार

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