हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में जुटे साहित्यकार, सावन गीत से लेकर वीर रस तक की कविताओं की हुई प्रस्तुति

गया जी के हिन्दी साहित्य सम्मेलन भवन में 622वीं काव्य संध्या का आयोजन हुआ. इस साहित्यिक गोष्ठी में कवियों ने गजल, वीर रस, और सावन गीत जैसी विविध रचनाएं प्रस्तुत कीं. कार्यक्रम में समसामयिक मुद्दों पर भी प्रकाश डाला गया.

गया जी जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन भवन में 622वीं काव्य संध्या का भव्य आयोजन किया गया. इस साहित्यिक गोष्ठी की अध्यक्षता सुरेन्द्र सिंह 'सुरेंद्र' ने की, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन उदय सिंह द्वारा किया गया.

काव्य संध्या का शुभारंभ विजय श्री ने सावन की फुहारों को समर्पित वर्षा गीत "मेघा बरस गेलो, चढ़लो मोरिया पर जवानिया" प्रस्तुत कर किया, जिसे उपस्थित प्रबुद्ध श्रोताओं ने खूब सराहा.

गजल, वीर रस और समसामयिक मुद्दों की रही गूंज

कार्यक्रम में उपस्थित कवियों और शायरों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं:

  • नौशाद नादा: "दर्द आंखों से टपका तो क्या हो गया, दिल के पिंजरे का पंछी रिहा हो गया."
  • घनश्याम अवस्थी: "हंस रहे वो साथ उनके हंस दिया करता हूं."
  • सिकन्दर दास: छात्र आंदोलन को समर्पित पंक्तियां- "इंकलाब जिंदाबाद के छात्र आगे बढ़ रहे."
  • डॉ. राम परीखा सिंह: सावन गीत- "आ गेल सावन के महीना, पियवा न ऐलन."
  • बैजू सिंह: "तन्हा-तन्हा हो जिंदगी के खेबइया न मिलतो, मरब त कौनो रोबइया न मिलतो."
  • उदय सिंह: "देशवा पर छाएल हइ संकटवा हो, भैया गांधी के बोला द."
  • शाहिद हुसैन ज़ैक: "जीवन में सुख दुख होवे, वैसे काटे जैसे बोये."
  • डॉ. निरंजन श्रीवास्तव: "आने वाला है सावन बाबा ने बुलाया है."
  • सुमन विश्वकर्मा: "जो मांगता सब की खैर, दुनिया को उसी से बैर."
  • धर्मेंद्र कुमार: "पापा की ये लाल परी, लगी करने धमाल परी."
  • मो. अफजल: "खत में उसने क्या लिखा है, पढ़ के मुझे बताओ न."
  • डॉ. प्रकाश: लोकतंत्र पर आधारित कविता "कैसा यह लोकतंत्र" प्रस्तुत की.
  • शंकर प्रसाद: "प्यार हमारा है तुम्हीं ने संवारा है."
  • बिपिन बिहारी: गजल के शेर- "गांव शहर कितना करीब हो गया, मगर गांव का किस्सा अजीब हो गया."
  • संदीप कुमार मोहन: आधुनिक जीवनशैली पर व्यंग्य- "खुद हुए पिज्जा बर्गर, पत्नी पार्लर हो गयी."

धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम

इसके अतिरिक्त जय प्रकाश सिंह ने पॉलीथिन के बढ़ते प्रयोग और पर्यावरण पर कविता सुनाई, जबकि बिनोद बरबिगहिया ने ओजस्वी वीर रस की कविता पढ़कर श्रोताओं में उत्साह भर दिया.

कार्यक्रम के अंत में जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री सुमंत ने उपस्थित सभी सम्मानित कवियों, साहित्यकारों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया.

Also Read : गया जी : नीट पेपर लीक के विरोध में जीटी रोड पर छात्रों का प्रदर्शन, लगा लंबा जाम


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Niraj kumar

ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >