हरिशयनी एकादशी के पावन अवसर पर शनिवार को गया स्थित प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. श्रद्धालुओं ने भगवान श्री हरि विष्णु के चरणों में शीश नवाकर अपने और अपने परिवार की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की.
सुबह से ही मंदिर प्रांगण में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह देर रात तक अनवरत जारी रहा.
भक्तिभाव से की भगवान श्री विष्णु चरण और माता लक्ष्मी की पूजा
एकादशी व्रत को लेकर श्रद्धालुओं ने सुबह पवित्र नदियों व कुंडों में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए और विष्णुपद मंदिर पहुंचे. श्रद्धालुओं ने हाथों में फूल, माला, धूप, दीप, नैवेद्य एवं प्रसाद लेकर भगवान श्री विष्णु के चरण चिह्न, माता लक्ष्मी तथा मंदिर परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की.
चार माह के लिए योगनिद्रा में गए भगवान विष्णु, मांगलिक कार्यों पर रोक
श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभूलाल विट्ठल ने बताया कि हरिशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ हो गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज से भगवान श्री विष्णु चार माह के लिए क्षीर सागर में योगनिद्रा (चीर निद्रा) में चले जाते हैं.
चातुर्मास के दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश व अन्य सभी प्रकार के शुभ व मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. उन्होंने आगे बताया कि इस चार महीने की अवधि में जप-तप और व्रत-त्योहारों का दौर लगातार जारी रहेगा.
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