गया जी के स्टेशन रोड स्थित गुरुद्वारा साहिब में धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश पर्व मनाया गया. इस अवसर पर सुखमणि साहिब का पाठ, कीर्तन और गुरु का लंगर आयोजित किया गया. ग्रंथी भाई दयाल सिंह ने कीर्तन किया, जबकि तबला वादक सरदार बेयंत सिंह ने संगत दी. कार्यक्रम का समापन दोपहर एक बजे हुआ, जिसके बाद गुरु का लंगर कराया गया.
अध्यक्ष और सचिव के विचार
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार सरब सिंह ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब केवल सिख समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं. इसमें प्रेम, समानता, मानवता, सेवा, सद्भाव, सत्य और भाईचारे का संदेश दिया गया है. कमेटी के सचिव सरदार मनजीत सिंह गांधी ने कहा कि गुरु साहिब की वाणी जात-पांत, ऊंच-नीच, भेदभाव और अहंकार से ऊपर उठकर मानव सेवा तथा प्रभु भक्ति का मार्ग दिखाती है.
पहला प्रकाश पर्व का इतिहास
कमेटी के कानूनी सलाहकार अधिवक्ता सरदार परमीत सिंह उर्फ अंकुश बग्गा ने बताया कि श्री गुरु अर्जन देव ने वर्ष 1604 में श्री हरिमंदिर साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश कराया था. उन्होंने बाबा बुद्ध जी को इसकी सेवा-संभाल की जिम्मेदारी सौंपी थी.
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य
इस धार्मिक आयोजन के दौरान संगत ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और गुरु महाराज के दरबार में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में गुरुद्वारा कमेटी के सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहा.
मौजूद रहे अन्य सदस्य
कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष सरदार भूपेंद्र सिंह प्रिंस, सदस्य कुलवंत सिंह, मिकी बग्गा, मनजीत सिंह छाबड़ा समेत अन्य लोग मौजूद रहे.
