Gayaji News: (गया से रोशन कुमार की रिपोर्ट)
गयाजी स्थित किलकारी बिहार बाल भवन में आयोजित समर कैंप “चक धूम-धूम” के तहत बच्चों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक का विशेष प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण के दौरान बच्चों ने कथक की मूलभूत तकनीकों, ताल-लय और भाव-भंगिमाओं को सीखा. बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लेते हुए भारतीय कला और संस्कृति के प्रति अपनी रुचि दिखाई.
विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने सिखाए कथक के मूल तत्व
समर कैंप में कथक नृत्य का प्रशिक्षण अंजली कुमारी द्वारा दिया गया. वहीं तबले पर अरविंद गोस्वामी और हारमोनियम पर प्रियदर्शी भार्गव ने बच्चों को संगीत के साथ तालमेल बैठाने का अभ्यास कराया. प्रशिक्षकों ने बच्चों को कथक की बुनियादी मुद्राएं, ताल, लय और अभिव्यक्ति के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया.
तत्कार, तिहाई और परण का कराया गया अभ्यास
प्रशिक्षण सत्र के दौरान बच्चों ने कथक की महत्वपूर्ण विधाओं जैसे तीनताल, तत्कार, तिहाई और परण का अभ्यास किया. प्रशिक्षकों ने नृत्य की बारीकियों को सरल तरीके से समझाया, जिससे बच्चे आसानी से सीख सकें और अपनी प्रस्तुति को बेहतर बना सकें.
कथक के इतिहास और सांस्कृतिक महत्व से भी कराया परिचय
नृत्य प्रशिक्षण के साथ-साथ बच्चों को कथक की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भारतीय संस्कृति में इसके महत्व की भी जानकारी दी गई. इससे बच्चों को केवल नृत्य सीखने का अवसर ही नहीं मिला, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समझने का भी मौका मिला.
बच्चों के उत्साह ने बढ़ाया कैंप का आकर्षण
कथक कक्षा में बच्चों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ भाग लिया. प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में उन्होंने नृत्य की विभिन्न तकनीकों को सीखने का प्रयास किया. बच्चों की लगन और रुचि ने प्रशिक्षण सत्र को और भी रोचक बना दिया.
संगीत, पेंटिंग और कराटे सहित कई गतिविधियां जारी
किलकारी समर कैंप का उद्देश्य बच्चों को भारतीय कला एवं संस्कृति से जोड़ना और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को विकसित करना है. कैंप में कथक के अलावा संगीत, पेंटिंग, नाटक, कराटे, क्राफ्ट और अन्य रचनात्मक गतिविधियों का भी प्रशिक्षण लगातार दिया जा रहा है, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके.
अभिभावकों ने की पहल की सराहना
बच्चों की सीखने की रुचि और प्रशिक्षण के दौरान उनकी सक्रिय भागीदारी को देखकर अभिभावकों ने भी खुशी जताई. उन्होंने किलकारी द्वारा आयोजित इस समर कैंप को बच्चों के व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया.
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