Gaya News : इंदौर की घटना के बाद भी नहीं खुली आंख, लीकेज के कारण घरों तक पहुंच रहा प्रदूषित पानी

Gaya News : जलापूर्ति का पानी प्रदूषित होने से इसे पीकर मध्य प्रदेश के इंदौर में 16 लोगों की जान जा चुकी है. इसके बावजूद कई दृष्टिकोण से प्रसिद्ध गया जी शहर में जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही देखने को मिल रही है.

गया जी. जलापूर्ति का पानी प्रदूषित होने से इसे पीकर मध्य प्रदेश के इंदौर में 16 लोगों की जान जा चुकी है. इसके बावजूद कई दृष्टिकोण से प्रसिद्ध गया जी शहर में जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही देखने को मिल रही है. शहर के कई इलाकों में राइजिंग, मेन और डिलेवरी पाइप नालियों से होकर गुजर रहे हैं, जिससे पानी के प्रदूषित होने का खतरा लगातार बना रहता है. स्थानीय लोगों के अनुसार मेन पाइपलाइन में नालियों के भीतर कई बार लीकेज की शिकायतें मिल चुकी हैं. इसके बावजूद न तो आम लोग सतर्कता बरत रहे हैं और न ही नगर निगम या बुडको इस ओर गंभीरता से ध्यान दे रहा है. सरकार की ओर से हाल के वर्षों में जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किये गये हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. शहर में लगभग रोज यह शिकायत सामने आती है कि पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है. यदि पानी आता भी है तो कुछ देर के लिए और वह भी गंदा व प्रदूषित होता है. हैरानी की बात यह है कि नगर निगम की ओर से हर माह केवल बोरिंग के पास के पानी की ही जांच की जाती है, जबकि अंतिम छोर तक पहुंचने वाले पानी की कोई जांच नहीं होती है.

वाटर कनेक्शन लेने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं

निगम से मिली जानकारी के अनुसार वाटर कनेक्शन लेने के लिए निगम या किसी विभाग से अनुमति लेने की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है. अधिकांश जगहों पर पुराने कनेक्शन खराब होने पर लोग मेन पाइप में निजी मिस्त्री से छेद कराकर नया कनेक्शन ले लेते हैं. कई मामलों में पुराने कनेक्शन को बंद तक नहीं किया जाता है. पानी की सप्लाइ बंद होने की स्थिति में इन्हीं छेदों के जरिये नालियों का गंदा पानी पाइपलाइन में चला जाता है. जैसे ही सप्लाइ शुरू होती है, वही प्रदूषित पानी सीधे लोगों के घरों तक पहुंचता है. ऐसे में लोगों को हर समय गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है. इतना ही नहीं, कई जगहों पर लोग राइजिंग पाइप से भी घरेलू कनेक्शन ले चुके हैं. हालांकि इस पर पूरी तरह से रोक होने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि लोग चोरी-छिपे इन पाइपों से कनेक्शन लेकर पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं.

क्या कहते हैं जलापूर्ति के कार्यपालक अभियंता

नगर निगम जलापूर्ति के कार्यपालक अभियंता राकेश कुमार सिंह ने बताया कि बोरिंग के पानी की जांच हर माह करायी जाती है. किसी स्थान से शिकायत मिलने पर या फिर जब निगम कर्मी स्वयं पानी का नमूना लेकर आते हैं, तब भी उसकी जांच करायी जाती है. उन्होंने कहा कि निगम द्वारा जलापूर्ति की जिम्मेदारी पूरी तरह संभालने के बाद अब हर क्षेत्र में रैंडम जांच की व्यवस्था लागू की जायेगी. निगम लोगों के स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह सजग है और किसी भी तरह की लापरवाही या खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

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By PRANJAL PANDEY

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