120 साल पुरानी तीन रेल सुरंग होगी और मजबूत, बिहार की इन धरोहरों के लिए रेलवे का मास्टर प्लान तैयार

Gaya-Koderma Rail Tunnel: गया-कोडरमा रेलखंड की 120 साल पुरानी गुरपा-गुझंडी घाट की तीन ऐतिहासिक रेल सुरंगों को रेलवे आधुनिक तकनीक से और मजबूत करेगा. सुरक्षा और परिचालन क्षमता बढ़ेगी.

गया जी से अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट
Gaya-Koderma Rail Tunnel:
बिहार के गया-कोडरमा रेलखंड पर स्थित गुरपा-गुझंडी घाट की 120 साल पुरानी तीन ऐतिहासिक रेल सुरंगों को रेलवे आधुनिक तकनीक से और मजबूत बनाने जा रहा है. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) और लंबी मालगाड़ियों के बढ़ते परिचालन को देखते हुए रेलवे ने इन सुरंगों के सुदृढ़ीकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है.

गया जी की खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें

रेलवे ने शुरू की सुदृढ़ीकरण की तैयारी

नई दिल्ली-हावड़ा ग्रैंड कॉर्ड रेलखंड के गुरपा-गुझंडी घाट सेक्शन में स्थित तीन ऐतिहासिक रेल सुरंगों को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में रेलवे ने अहम पहल की है. बढ़ते रेल यातायात और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) की जरूरतों को देखते हुए इन सुरंगों के संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण की योजना तैयार की जा रही है.

120 साल पुरानी हैं तीनों सुरंगें

ब्रिटिश शासनकाल में इन तीनों सुरंगों का निर्माण 6 दिसंबर 1906 को पूरा हुआ था. इनकी लंबाई क्रमशः 496 मीटर, 454 मीटर और 395 मीटर है. वर्ष 2026 में ये सुरंगें अपने निर्माण के 120वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी हैं और आज भी गया-कोडरमा रेलखंड की महत्वपूर्ण धरोहर बनी हुई हैं.

अधिकारियों ने किया निरीक्षण

हाल ही में पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक और धनबाद मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) अखिलेश कुमार मिश्रा ने गुरपा-गुझंडी घाट सेक्शन का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान सुरंगों की वर्तमान स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था, रखरखाव और भविष्य की जरूरतों पर तकनीकी विशेषज्ञों के साथ विस्तार से चर्चा की गई.

आधुनिक तकनीक से होगी मजबूती

रेल अधिकारियों के अनुसार विशेषज्ञ एजेंसियों की सहायता से सुरंगों के विस्तार, पुनर्रचना और अतिरिक्त संरचनात्मक मजबूती का कार्य किया जाएगा. आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के जरिए इन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जाएगा.

बढ़ती मालगाड़ियों को मिलेगा फायदा

गया-कोडरमा रेलखंड देश के सबसे व्यस्त रेलमार्गों में शामिल है. यहां प्रतिदिन करीब 300 यात्री और मालगाड़ियों का परिचालन होता है. प्रस्तावित परियोजना पूरी होने के बाद लंबी और अधिक भार क्षमता वाली मालगाड़ियों के संचालन में भी सुविधा मिलेगी और रेल परिचालन अधिक सुरक्षित होगा.

एक सदी से अधिक समय से बनी हुई हैं मजबूत

रेलवे के अनुसार पिछले 100 वर्षों से अधिक समय में इन सुरंगों में जल रिसाव, चट्टानों से पत्थर गिरने और प्राकृतिक क्षरण जैसी चुनौतियां सामने आती रही हैं. हालांकि नियमित रखरखाव और तकनीकी उपायों के कारण इनका सुरक्षित संचालन लगातार जारी है.

ब्रिटिश इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण

गुरपा-गुझंडी घाट सेक्शन ग्रैंड कॉर्ड परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जाता था. करीब 22 किलोमीटर लंबे पहाड़ी क्षेत्र में आधुनिक मशीनों के बिना हजारों मजदूरों ने हथौड़ी, छैनी, फावड़े और डायनामाइट की मदद से इन सुरंगों का निर्माण किया था. सुरंगों के भीतर ईंट और पत्थर की मेहराबी लाइनिंग की गई थी, जिसकी मजबूती के कारण ये आज भी भारतीय रेलवे की ऐतिहासिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती हैं.

Also Read: तेजस्वी यादव के पास कोई काम नहीं… गया जी पहुंचते ही केंद्रीय मंत्री ने क्यों दिया ऐसा बयान, जानिए

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Sakshi Kumari

साक्षी कुमारी को डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 वर्षों का अनुभव है. पिछले तीन वर्षों से वह डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. उन्हें राजनीति, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव है. बिहार की राजनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर उनकी विशेष रुचि है. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization) की भी अच्छी समझ है, जिससे वह पाठकों तक समय पर और प्रभावी ढंग से खबरें पहुंचाने में दक्ष हैं. तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यशैली है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >