गया में सजी काव्य संध्या 629, कवियों ने गीत, गजल और कविताओं से बांधा समां

गया जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य संध्या 629 का आयोजन हुआ, जहाँ कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिन्दी भाषा और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की।

संवाददाता, गया जी. जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य संध्या 629 का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेन्द्र सिंह सुरेंद्र ने की, जबकि संचालन सहज कुमार ने किया.

अजीत कुमार ने गीत से दिया नेकी का संदेश

गीतकार अजीत कुमार ने गीत प्रस्तुत करते हुए कहा, "नेकी करते हो तो करते रहो परवाह नहीं, मुझ पे उंगली उठाओगे तो फिर बुरा होगा."

नौशाद नादां और बिपिन बिहारी ने सुनायी गजल

नौशाद नादां ने गजल प्रस्तुत की. उन्होंने कहा, "खाते नहीं फरेब कभी भी किसी से हम, लेकिन हलाल हो गए मिठ्ठी छुरी से हम." वहीं, बिपिन बिहारी ने गजल में कहा, "कितनों को खुश रखें सब हो जाये नाराज, होने दो."

बैजू सिंह ने गजल को बताया पजल

बैजू सिंह ने अपनी प्रस्तुति में कहा, "यह गजल नहीं पजल है, आधा हकीकत आधा फसाना." उनकी प्रस्तुति को कार्यक्रम में शामिल लोगों ने सुना.

सुमन विश्कर्मा विकल ने शोध और विरोध पर कविता पढ़ी

सुमन विश्कर्मा विकल ने अपनी कविता में कहा, "शोध करो कभी कभी विरोध करो, ऐसा न हो शोध छोड़ विरोध करो."

चंद्रशेखर सिंह ने सुनाया भोजपुरी गीत

चंद्रशेखर सिंह ने गीत प्रस्तुत करते हुए कहा, "मोही लेलकई श्याम के सुरतिया, सुन राधा सखिया."

हिन्दी की महिमा पर डॉ निरंजन श्रीवास्तव की कविता

डॉ निरंजन श्रीवास्तव ने अपनी कविता में कहा, "भारतवर्ष के माथे की बिंदी, जो कहलाती जग में हिन्दी." वहीं, शंकर प्रसाद ने कहा, "दुख के दिन होते चार, बात मानो मेरे यार."

राधा-कृष्ण पर गजेन्द्र लाल अधीर की प्रस्तुति

गजेन्द्र लाल अधीर ने अपनी प्रस्तुति में कहा, "सदा आराधिका रही कृष्ण की कहलाती है राधा." अतुलित उदय ने शिक्षा पर आधारित कविता पढ़ी और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, "सुनो प्यारे विद्यार्थियों, बहुत ज्यादा आज्ञाकारी होना ठीक बात नहीं होता."

संत विनोबा भावे को समर्पित रही कविता

डॉ राम परिखा सिंह ने संत विनोबा भावे को समर्पित कविता पढ़ी. वहीं, जय प्रकाश सिंह ने अपनी कविता में कहा, "हिन्दी भाषा भारत की शान, बना रही दुनिया में अपनी पहचान."

फोटो- गया- कार्यक्रम में शामिल लोग | Prabhat Khabar Network

सोशल मीडिया पर रजनीश कुमार सिंह की कविता

रजनीश कुमार सिंह ने अपनी कविता में सोशल मीडिया का जिक्र करते हुए कहा, "ट्विटर फेसबुक के दंगल में छंद क्रांति सब लाते हैं और लगा न पाये एक पेड़ पर हैशटैग रोज चलाते हैं."

पेपर लीक पर किशन कुमार ने उठाया सवाल

किशन कुमार ने अपनी कविता में कहा, "देश हमारा कहां खड़ा है. जहां हर बार परीक्षा से पहले पेपर लीक हो जाता है." मंजू बाला ने कहा, "आईना क्यों न हो, सामना कीजिए."

अन्य कवियों ने भी दी अपनी प्रस्तुतियां

बिनोद बरबिगहिया ने कहा, "मिट्टी समान हम प्राणी रहे जन्म से." डॉ राकेश कुमार सिन्हा रवि ने चश्मा पर कविता पढ़ते हुए कहा, "अब जवानी की तासीर चश्मा ही छुए, चश्मे की बात चले तो दाम हजार करोड़."

भोजपुरी गीत से हुआ गयाजी की महिमा का गुणगान

सहज कुमार ने गयाजी की महिमा का गुणगान भोजपुरी गीत से किया. खालिक हुसैन परदेसी ने कहा, "तू है श्याम और रात है काली." वहीं, सुमंत ने कहा, "देते हो दगा रोज झूठी बातें बनाकर."

सभापति ने सभी के प्रति जताया आभार

कार्यक्रम के अंत में सभापति ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया.

ALSO READ : पितृपक्ष मेला 2026 को लेकर गया में बिजली व्यवस्था दुरुस्त, ट्रांसफार्मर और तारों की हुई मरम्मत

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By नीरज कुमार

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >