मानपुर से उदय शंकर की रिपोर्ट
Gaya Ji News : विश्व संगीत दिवस के अवसर पर मानपुर (गयाजी) स्थित सुरधारा कला केंद्र में कथक नृत्य प्रशिक्षण कार्यशाला (वर्कशॉप) का शानदार शुभारंभ हुआ. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि तबला वादक विशेषज्ञ यदुवंश दादा, वरीय अधिवक्ता महावीर प्रसाद और केंद्रीय विद्यालय के सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) शिक्षक जैनेन्द्र कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर किया.
इस मौके पर अतिथियों ने कहा कि संगीत के बिना मानव जीवन बिल्कुल नीरस है. संगीत हमारी प्राचीनतम कला है, जो गांवों से लेकर बड़े-बड़े राजघरानों और देश-विदेश तक अलग-अलग भाषाओं व शैलियों में फैली हुई है.
विलुप्त हो रही पारंपरिक कला को सहेजने का प्रयास
अतिथियों ने चिंता जताते हुए कहा कि आज की नई जीवनशैली की वजह से कुछ पारंपरिक नृत्य और संगीत हमसे दूर होते जा रहे हैं. इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को इसके गुर सिखाना बेहद जरूरी है. इसी उद्देश्य के साथ मानपुर में विलुप्त हो रही कथक नृत्य कला को बचाने के लिए आगामी 22 जून से 7 जुलाई तक इस विशेष वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है.
लखनऊ घराने से जुड़ीं खुशी कुमारी देंगी निशुल्क ट्रेनिंग
सुरधारा कला केंद्र के निदेशक बिपिन बिहारी ने बताया कि इस कार्यशाला की मास्टर ट्रेनर खुशी कुमारी हैं. खुशी कुमारी गयाजी शहर के गावलबीघा मोहल्ले की रहने वाली हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के लखनऊ घराने से कथक नृत्य में उच्च शिक्षा और महारत हासिल कर रही हैं.
स्थानीय स्तर पर सुरधारा कला केंद्र से जुड़े छात्र-छात्राओं को कथक नृत्य का यह प्रशिक्षण पूरी तरह से निशुल्क (फ्री) दिया जा रहा है, ताकि गयाजी शहर में कथक नृत्य के मान-सम्मान और पहचान को बचाया जा सके.
गायन, वादन और नृत्य का महासंगम है संगीत
इस अवसर पर यदुवंशी दादा ने संगीत की परिभाषा बताते हुए कहा कि वास्तव में संगीत उसे कहते हैं, जिसमें गायन, वादन और नृत्य तीनों कलाओं का अद्भुत महासंगम देखने को मिले. इस उद्घाटन कार्यक्रम में सुरधारा कला केंद्र के आर्ट शिक्षक राज आर्ट, राम कुमार, मगही कवि विजय शर्मा, क्रेन स्कूल के संगीत शिक्षक श्याम कुमार, दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की शोधकर्ता पलक रानी और अर्चना कुमारी समेत केंद्र के कई छात्र-छात्राएं मुख्य रूप से शामिल हुए.
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