Gaya Ji News: बहुभाषी लोगों का व्यक्तित्व विकास अधिक होता है : सीयूएसबी कुलपति

Gaya Ji News: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने सीबीएसई के त्रिभाषा फार्मूला को राष्ट्रीय एकता और व्यक्तित्व विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि बहुभाषी लोगों को विभिन्न संस्कृतियों और वातावरण में घुलने-मिलने में आसानी होती है.

Gaya Ji (कलेंद्र प्रताप की रिपोर्ट): केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देशभर के शिक्षण संस्थाओं में त्रिभाषा फार्मूला को क्रियान्वित करके राष्ट्रीय एकता के हित में प्रशंसनीय कार्य किया है. त्रिभाषा फार्मूला में किसी भी भाषा को थोपने का प्रयास नहीं किया गया है, अपितु हर छात्र अपनी इच्छा के अनुसार दो भारतीय भाषा एवं एक कोई अन्य भारतीय भाषा या विदेशी भाषा का चयन कर सकता है. उक्त वक्तव्य दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने सीबीएसइ के त्रिभाषा फार्मूला पर आयोजित एक विशेष परिचर्चा में दिया.

उन्होंने कहा कि निजी अनुभव के आधार पर मेरा यह मानना है ऐसे लोग जो बहुभाषी होते हैं. उनका व्यक्तित्व विकास बहुत अधिक होता है. वे देश के किसी भी प्रांत में जाते हैं, उन्हें वहां के वातावरण एवं संस्कृति में घुलने-मिलने में ज्यादा कठिनाई नहीं होती है.

दुष्प्रचार से बचने और जागरूकता बढ़ाने की अपील

कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) 2020 के प्रावधानों के अंतर्गत सीबीएसइ ने त्रिभाषा फार्मूला को स्कूल स्तर पर लागू करने के निर्णय लिया है जो स्वागत योग्य है. लेकिन देश में कुछ लोगों द्वारा इसका दुष्प्रचार किया जा रहा है, जो उचित नहीं है. इसलिए हमें इस चर्चा को विश्वविद्यालय की चहारदीवारी तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे आसपास के स्कूलों में भी ले जाने की जरूरत है. उन्होंने सभाकक्ष में मौजूद प्राध्यापकों को विशेष रूप से कहा कि ‘कैंपस फॉर कम्युनिटी’ ध्यय पर कार्य करते हुए हम सभी को जन-जन तक त्रिभाषा फार्मूला के तथ्यों को साझा करना होगा तभी इस परिचर्चा का उद्देश्य पूरा होगा.

स्वागत भाषण से हुआ परिचर्चा का उद्घाटन

पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के डीन एवं अध्यक्ष प्रो. ब्रजेश कुमार के स्वागत भाषण से हुआ और उन्होंने परिचर्चा के उद्देश्य एवं विषयवस्तु को सभाकक्ष में मौजूद विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्षों, प्राध्यापकों व अधिकारियों से साझा किया.

परिचर्चा में शिक्षाविदों और प्राध्यापकों ने लिया भाग

परिचर्चा में प्रो. कृष्णन चलिल, प्रो. आतिश पराशर, प्रो. प्रणव कुमार, प्रो. प्रवीण कुमार, प्रो. सुब्रत कुमार भट्टमिश्र, प्रो. के. मिलन शर्मा, प्रो. अशोक कुमार, डॉ. मितांजलि साहू, डॉ. रामचंद्र रजक, डॉ. हरेश नारायण पांडे, डॉ. तरुण कुमार त्यागी, डॉ. प्रज्ञा गुप्ता, डॉ. अबोध कुमार, डॉ. विकल कुमार सिंह, डॉ. मंजीत सिंह, डॉ. सुधांशु झा, डॉ. अम्हेदुल कबीर, डॉ. चेतना जयसवाल, डॉ. नीतीश कुमार, डॉ. आतिश कुमार दास, डॉ. प्रीति अनिल खंडारे, डॉ. परिमाला वेणु, डॉ. सप्तऋषि घोष, डॉ. जाधव प्रताप सिंह, डॉ. आर के वर्मा, डॉ. चंद्रकला कुरुबा, डॉ. मनीषा तिवारी व शशिरंजन ने भाग लिया.

त्रिभाषा फार्मूला के कई साकारत्मक पहलु हैं

परिचर्चा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि त्रिभाषा फार्मूला एक सराहनीय कदम है और इसके बहुआयामी लाभ होंगे. कार्यक्रम में अंत में इकोनॉमिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रो कृष्णन चलिल ने परिचर्चा के सारांश को प्रस्तुत करते हुए मुख्य बिंदुओं को साझा किया. परिचर्चा के सारांश प्रस्तुत करते हुए प्रो चालिल ने कहा कि त्रिभाषा फार्मूला के कई साकारत्मक पहलु हैं, जिनमें बहुभाषावाद, अंतर-राज्यीय सहयोग को बढ़ावा देना, पर्यटन, व्यापार, कानून में सांविधिक व्याख्या और सांस्कृतिक बाधाओं को तोड़ना भी शामिल था.

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Published by: Vikas Jha

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