1339 करोड़ की लागत से गया में बन रहा मेगा इंडस्ट्रियल हब, एक लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

Gaya Dobhi Industrial Corridor: गया जिले के डोभी प्रखंड में अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रोजेक्ट का काम तेज हो गया है. 1670.22 एकड़ में बनने वाले इस इंडस्ट्रियल एरिया पर 1339 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे. प्रोजेक्ट से लगभग एक लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है.

Gaya Dobhi Industrial Corridor: बिहार के गया जिले के डोभी प्रखंड क्षेत्र में अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो गया है. निर्माण एजेंसियों ने करीब 1670.22 एकड़ भूमि को लेवलिंग करने का काम तेज कर दिया है. लगभग 1339.02 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाले इस आधुनिक हब के पूरी तरह तैयार होने के बाद क्षेत्र के करीब एक लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है.

केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाला यह कॉरिडोर डोभी प्रखंड के खरांटी पंचायत के 13 राजस्व गांवों के दायरे में फैला हुआ है. इसमें मुख्य रूप से अमारुत, मंगरुचक, बरिया, गंजीचक, खरांटी, सुगासोत और मंझौली जैसे गांव शामिल हैं. इंडस्ट्रियल एरिया के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण का काम पूरी तरह संपन्न हो चुका है और विभिन्न विभागों से जरूरी प्रशासनिक स्वीकृतियां व पर्यावरण मंजूरी भी मिल चुकी है.

फूड प्रोसेसिंग और इंजीनियरिंग का बनेगा हब

इस आधुनिक इंडस्ट्रियल एरिया में फूड प्रोसेसिंग, टेक्निकल डिवाइस निर्माण, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और पैकेजिंग से जुड़ी देश-विदेश की बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित की जाएंगी. इसके साथ ही, कॉरिडोर के अंदर ही एक स्किल डेवलपमेंट सेंटर, अस्पताल, होटल, बिजनेस सेंटर और सामुदायिक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा.

परियोजना के लिए कुल 37.41 एमएलडी पानी की जरूरत आंकी गई है. फैक्ट्रियों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने के लिए 14.50 एमएलडी क्षमता के दो कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे, जिससे शोधित जल का दोबारा इस्तेमाल हो सके. बिजली आपूर्ति के लिए 162 MVA क्षमता सुनिश्चित करते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षित अंडरग्राउंड इलेक्ट्रिसिटी नेटवर्क और लेटेस्ट डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम विकसित की जाएगी. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 34 टीपीडी क्षमता का प्लांट भी बनेगा.

हाईवे से सीधी कनेक्टिविटी और रेलवे साइडिंग की सुविधा

यह कॉरिडोर जीटी रोड (NH-19) से महज सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और एनएच-22 भी इसके पास से गुजरता है. इन दोनों नेशनल हाईवे को कॉरिडोर से जोड़ने के लिए नई सड़कों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है. इसके अलावा नजदीकी रेलवे स्टेशन से परियोजना क्षेत्र तक नई रेल कनेक्टिविटी और माल ढुलाई को आसान बनाने के लिए स्पेशल रेलवे साइडिंग व लॉजिस्टिक सुविधाएं भी तैयार की जाएंगी.

55 प्रतिशत हिस्से में लगेंगी फैक्ट्रियां

टोटल जमीन का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ इंडस्ट्रियल यूनिट और फैक्ट्रियों के लिए सुरक्षित रखा गया है. इसके अलावा 18 प्रतिशत हिस्सा सड़कों व पार्किंग के लिए और 20.30 प्रतिशत हिस्से पर पर्यावरण संतुलन के लिए एक बड़ा ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाएगा. शेष बची हुई जमीन का उपयोग आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए होगा.

बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें

स्थानीय युवाओं का रुकेगा पलायन

इस मेगा प्रोजेक्ट के चालू होने से गया, डोभी और आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी. फैक्ट्रियां शुरू होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा. मेन कॉरिडोर के सहयोगी के रूप में छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को भी आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे. निर्माण एजेंसियों द्वारा धरातल पर सबसे पहले बिजली, पानी और मुख्य सड़कों का विकास किया जा रहा है.

इसे भी पढ़ें: खान सर के पार्टनर रहे निखिल सर ने लगाए गंभीर आरोप, बोले- इसने मेरा संस्थान मुझसे छीन लिया

बिहार प्रशासनिक सेवा के अफसरों को बड़ा तोहफा, 16 बीएएस अधिकारी बने आईएएस, देखें पूरी लिस्ट

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >