Gaya Fake Challan Case : साइबर अपराध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. अब वाहन मालिकों को भी नंबर प्लेट व मोबाइल नंबर की टेंपरिंग और फर्जी चालान के नाम पर परेशान किए जाने का मामला सामने आया है. गया के कई वाहन मालिकों के मोबाइल पर ऐसे चालान के मैसेज पहुंच रहे हैं, जिनके मुताबिक उनके वाहन ने दूसरे जिले में यातायात नियमों का उल्लंघन किया है.
हैरानी की बात यह है कि जिस समय चालान काटे जाने की बात कही जा रही है, उस समय संबंधित वाहन मालिकों के वाहन उनके घर या गया शहर में खड़े थे. गया में अब तक कम से कम चार वाहन मालिकों ने इस तरह की शिकायत सामने रखी है.
मामले मोतिहारी जिले से चालान कटने से जुड़े बताए जा रहे हैं. चालान के मैसेज मिलने के बाद वाहन मालिकों में हड़कंप मच गया है. उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित समय पर अपने वाहन को दूसरे जिले में ले ही नहीं गए थे.
इसके बावजूद उनके मोबाइल पर चालान जमा करने का संदेश पहुंच गया. मामले से परेशान वाहन मालिकों ने गया जी के जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) और ट्रैफिक डीएसपी से शिकायत की है.
घर के दरवाजे पर खड़ी गाड़ी और मोतिहारी से चालान
वाहन मालिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उनकी गाड़ी गया में घर के दरवाजे पर खड़ी थी, तो मोतिहारी या किसी दूसरे जिले में उसी नंबर की गाड़ी ने यातायात नियमों का उल्लंघन कैसे कर दिया.
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कहीं न कहीं नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ या वाहन के नंबर का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है.
वाहन मालिकों को आशंका है कि साइबर गिरोह द्वारा किसी दूसरे वाहन पर उनके वाहन का नंबर इस्तेमाल कर चालान कटवाया जा रहा है. हालांकि, वास्तविकता क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. फिलहाल लगातार आ रहे चालान के मैसेज ने वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ा दी है.
डॉक्टर और अन्य पीड़ित वाहन मालिकों के मामले
नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि उनकी गाड़ी दो अगस्त को गया में ही उनके घर पर खड़ी थी. वह अपनी गाड़ी लेकर कहीं बाहर नहीं गए थे.
इसके बावजूद अचानक उनके मोबाइल पर मोतिहारी से चालान भरने का मैसेज प्राप्त हुआ. उन्होंने बताया कि मोबाइल पर चालान का संदेश देखकर वह काफी परेशान हो गए. उन्होंने वाहन और चालान से संबंधित जानकारी की जांच की तो मामला संदिग्ध लगा. उनका कहना है कि जब उनकी गाड़ी गया से बाहर गई ही नहीं, तो मोतिहारी में यातायात नियमों का उल्लंघन करने का चालान कैसे कट गया.
उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मोतिहारी के डीटीओ और ट्रैफिक डीएसपी को ई-मेल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने और यह पता लगाने की मांग की है कि उनके वाहन नंबर का इस्तेमाल किस तरह किया गया.
वाहन नंबर तक नहीं था, फिर भी आ गया चालान का मैसेज
दूसरे मामले में निरंजन कुमार ने बताया कि उनके मोबाइल नंबर पर चालान जमा करने से संबंधित एक मैसेज आया. मैसेज मिलने के बाद उन्होंने उसे देखा तो वह हैरान रह गए.
उनका कहना है कि मैसेज में जिस वाहन के चालान से संबंधित जानकारी थी, वह वाहन उनके पास है ही नहीं. निरंजन कुमार ने बताया कि उनके पास उस तरह का कोई ट्रक वाहन भी नहीं है, जिसका चालान काटे जाने का मैसेज उनके मोबाइल पर आया. ऐसे में उनके मोबाइल नंबर पर चालान का संदेश पहुंचना अपने आप में सवाल खड़ा करता है.
उन्होंने इस मामले की शिकायत गया डीटीओ कार्यालय में की है. उनका कहना है कि संबंधित विभाग को यह पता लगाना चाहिए कि उनका मोबाइल नंबर किस तरह चालान से जुड़ा और जिस वाहन का चालान बताया जा रहा है, उसका वास्तविक मालिक कौन है.
नंबर प्लेट टेंपरिंग, जांच और डीटीओ का बयान
नंबर प्लेट टेंपरिंग या डेटा के दुरुपयोग का शक. पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल नंबर प्लेट टेंपरिंग का है. आशंका जताई जा रही है कि किसी वाहन पर दूसरे वाहन का नंबर प्रदर्शित कर यातायात नियमों का उल्लंघन किया जा रहा हो.
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अगर कैमरे में उस वाहन की तस्वीर कैद होती है और सिस्टम में वास्तविक नंबर के आधार पर चालान बनता है, तो उसका संदेश असली वाहन मालिक तक पहुंच सकता है. हालांकि, यह भी जांच का विषय है कि इन मामलों में वाहन नंबर के साथ छेड़छाड़ हुई है या मोबाइल नंबर अथवा वाहन संबंधी डेटा का किसी स्तर पर दुरुपयोग किया गया है.
इसलिए वाहन मालिकों ने परिवहन और पुलिस अधिकारियों से मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है. शिकायत के बाद जांच से खुलेगा पूरा राज. वाहन मालिकों की शिकायत के बाद अब पूरे मामले में जांच जरूरी हो गई है. जांच में चालान के समय की फोटो, वाहन की नंबर प्लेट, वाहन का मॉडल, रंग और अन्य पहचान संबंधी विवरण का मिलान किया जा सकता है. इसके अलावा यह भी देखा जाना जरूरी है कि चालान किस स्थान पर और किस कैमरे के माध्यम से काटा गया.
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अगर चालान की तस्वीर में वाहन का मॉडल और नंबर अलग-अलग पाए जाते हैं, तो नंबर प्लेट टेंपरिंग की आशंका मजबूत हो सकती है.
वहीं, अगर चालान में दर्ज मोबाइल नंबर का किसी अन्य तरीके से इस्तेमाल हुआ है, तो डेटा के दुरुपयोग का मामला सामने आ सकता है. क्या कहते हैं डीटीओ. इस संबंध में डीटीओ राजेश कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी. फिलहाल मोतिहारी के अधिकारियों से संपर्क करना होगा. हालांकि, इसकी जांच शुरू की जाएगी. इस मामले को लेकर तकनीक की भी जांच की जाएगी.
