बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार ने बुधवार को अपने कार्यालय कक्ष में उद्योग विभाग की विभिन्न उद्यमी योजनाओं की समीक्षा बैठक की. बैठक में उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा गया के विभिन्न औद्योगिक व बुनकर संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. बैठक में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना, बिहार लघु उद्यमी योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में गया से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए डॉ प्रेम कुमार ने उद्योग मंत्री से जीआइ टैग प्राप्त पथरकट्टी के पत्थर शिल्प कारीगरों की समस्याओं के समाधान की मांग की. उन्होंने शादीपुर स्थित बियाडा की भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने, धनामा गांव के करीब 50 उद्योगों को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, बोधगया बियाडा क्षेत्र के विस्तार, मानपुर औद्योगिक क्षेत्र के विकास व तिलकुट को जीआइ टैग प्रदान करने का अनुरोध किया. उन्होंने गया-डोभी औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इस परियोजना में स्थानीय उद्यमियों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया. उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने आश्वस्त किया कि बैठक में उठाये गये सभी बिंदुओं और अध्यक्ष द्वारा दिये गये सुझावों पर शीघ्र कार्रवाई की जायेगी. बैठक में उद्योग विभाग की मंत्री श्रेयसी सिंह, एमएसएमइ निदेशक अमन समीर, उद्योग निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता, हथकरघा एवं रेशम उत्पादन निदेशक विद्यानन्द सिंह तथा निदेशक (प्रशासन) विजय कुमार उपाध्याय सहित विभाग के वरीय अधिकारी उपस्थित रहे. वहीं, उद्योग संगठनों की ओर से मगध इंडस्ट्री एसोसिएशन के अनुप केडिया, कौशलेंद्र प्रताप सिंह व प्रदीप कुमार, गया जी जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष रौनक सिंह सेठ एवं शुभम श्रीवास्तव, वस्त्र उद्योग बुनकर सेवा समिति के अध्यक्ष प्रेमनारायण पटवा तथा मगध बुनकर संघ के अध्यक्ष दुखन पटवा ने भाग लिया. बैठक में बिहार विधानसभा की प्रभारी सचिव सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे.
औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बैंक लोन स्वीकृति में देरी का उठाया मुद्दा
बैठक में औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बैंक ऋण स्वीकृति में देरी, बाजार व विपणन की समस्या, तकनीकी और प्रबंधन कौशल की कमी, वित्तीय साक्षरता तथा उद्योगों की दीर्घकालिक स्थिरता जैसी समस्याएं उठायी. इस पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक जिले में ऋण शिविर आयोजित किए जायेंगे. साथ ही विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बिहार राज्य मार्केटिंग अथॉरिटी का गठन और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए भारत सरकार की आरएएमपी ल योजना के तहत एमएसएमई केंद्र स्थापित किये जा रहे हैं.
