एक ही काम करो, लेकिन अलग तरीके से करो : डॉ गुलशन

डीबीटी वैज्ञानिक ने भारतीय वैज्ञानिक डॉ जीएन रामचंद्रन की जयंती पर कार्यक्रम को किया संबोधित

फोटो- गया बोधगया 210- कार्यक्रम में संबोधित करते डॉ गुलशन वाधवा

डीबीटी वैज्ञानिक ने भारतीय वैज्ञानिक डॉ जीएन रामचंद्रन की जयंती पर कार्यक्रम को किया संबोधित

वरीय संवाददाता, गया जी

सीयूएसबी के स्कूल ऑफ अर्थ, बायोलॉजिकल एंड एनवायर्नमेंटल साइंसेज (एसइबीइएस) के अंतर्गत संचालित बायोइन्फॉरमेटिक्स विभाग ने प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक डॉ जीएन रामचंद्रन की 103वीं जयंती के उपलक्ष्य में बायोइन्फॉरमेटिक्स दिवस मनाया. कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शारदा विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली के प्रो डॉ गुलशन वाधवा शामिल हुए. भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के पूर्व वैज्ञानिक व सलाहकार डॉ गुलशन वाधवा ने हाल के नोबेल पुरस्कार विजेता अध्ययनों के उदाहरणों का हवाला देते हुए वैज्ञानिक जीएन रामचंद्रन अनुसंधान में नवाचार के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कई नोबेल पुरस्कार विजेताओं को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके काम को एक दिन इतनी वैश्विक मान्यता मिलेगी, लेकिन जो बात उन्हें अलग बनाती थी, वह यह थी कि वे समस्याओं का अलग तरीके से सामना करते थे. वही कर रहे हैं, लेकिन अलग तरीके से. डॉ वाधवा ने डीबीटी के साथ अपने तीन दशक के लंबे करियर के साथ भारत भर में 150 से अधिक डीबीटी जैव सूचना विज्ञान केंद्रों की स्थापना और समर्थन सहित कई प्रमुख पहलों में अपनी भागीदारी से प्राप्त अंतर्दृष्टि साझा किया. पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि डॉ वाधवा के संबोधन ने श्रोताओं, विशेषकर छात्रों को प्रेरित किया और उन्हें समर्पण व एक नये दृष्टिकोण के साथ उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया. इससे पहले परिचयात्मक भाषण में जैव सूचना विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रो आरएस राठौर ने जीएन रामचंद्रन को श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें भारत के सबसे कुशल जीव वैज्ञानिकों में से एक बताया. प्रो राठौर ने प्रो रामचंद्रन व उनके पीएचडी छात्र प्रो सी रामकृष्णन के अभूतपूर्व रामचंद्रन मानचित्र के विकास और कोलेजन संरचना पर उनके कार्य के प्रति अप्रतिम समर्पण की बात की. उनके अथक प्रयास की तुलना तपस्या (आध्यात्मिक भक्ति) से की. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता के लिए केंद्रित और निरंतर कार्य की ऐसी संस्कृति आवश्यक है. एसइबीइएस के डीन प्रो रिजवानुल हक ने स्कूल द्वारा हाल ही में शुरू की गयी शैक्षणिक और शोध पहलों पर प्रकाश डाला और छात्रों से जीएन रामचंद्रन जैसे महान वैज्ञानिकों के जीवन और योगदान से प्रेरणा लेने का आग्रह किया. संगोष्ठी में प्रो अजय कुमार सिंह (एचबीटीयू, कानपुर), प्रो आशीष शंकर, डॉ डीवी सिंह, डॉ केके ओझा, डॉ वीके सिंह, डॉ अनिल कुमार सहित संकाय सदस्यों और शोधार्थियों एवं छात्रों ने भाग लिया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Kalendra pratap singh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >