दीपावली में डेढ़ करोड़ के मिट्टी के दीयों से रोशन होगा शहर

कुम्हार समाज के करीब 150 परिवार दो महिनों से दीये बनाने में जुटे

दो माह पहले से बनाने में जुटा डेढ़ सौ प्रजापति परिवार

फोटो- गया- मिट्टी के दीये बनाते कारीगरसंवाददाता, गया जीदीपावली में इस बार डेढ़ करोड़ से अधिक के मिट्टी के दीयों से शहर रोशन होगा. कुम्हार समाज के करीब 150 परिवार दो महिनों से दीये बनाने में जुटे हैं. माड़नपुर बाईपास के रहने वाले सूरजदेव प्रजापति ने बताया कि दीपावली से पहले तक एक परिवार औसतन करीब एक लाख दीये बना लेता हैं. इस बार डेढ़ करोड़ से अधिक दीये बना लिये जायेंगे. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शहर सहित पूरे देश में दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने की पुरानी परंपरा रही है. शहर सहित जिले में करीब 50 हजार कुम्हार परिवार के लोग इस कला से प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से जुड़े हैं. इनमें से करीब पांच सौ परिवार शहर में रहता है. दीपावली में सबसे अधिक उपयोग में आने वाले मिट्टी के दीये, खिलौने, कलश, घरकुंडा, धूपदानी, चुक्का, प्याली व अन्य मिट्टी के बर्तन बनते हैं. मुन्ना प्रजापति ने बताया कि दीपावली में विशेष कर दीये का कारोबार काफी बढ़ जाता है. शहर में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, धार्मिक स्थलों व सार्वजनिक जगहों पर भी दीपावली के मौके पर दीये जलाये जाते हैं.

चार साइज में बनाये जा रहे दीये

दीपावली पर प्रजापति परिवार द्वारा इस बार भी चार साइज में मिट्टी से दीये बनाये जा रहे हैं. थोक बाजार में सबसे छोटी दीये 600 रुपये प्रति हजार, इससे बड़ी 1000 रुपये प्रति हजार, मध्यम आकार की 2500 रुपये प्रति हजार व सबसे बड़ी दीये इस बार 500 रुपये प्रति सैंकड़ा बिक रहा है.

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By NIRAJ KUMAR

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