Gaya ji News : कैंसर मरीजों को अब इलाज और जांच के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ रहा है. मगध मेडिकल अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल स्थित कैंसर यूनिट में मरीजों को स्थानीय स्तर पर कीमोथेरेपी, बायोप्सी, छोटे-मोटे ऑपरेशन और भर्ती कर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.
ओरल कैंसर का ऑपरेशन भी शुरू, डॉक्टरों को दी गयी ट्रेनिंग
मगध मेडिकल अस्पताल परिसर में होमी भाभा कैंसर रिसर्च सेंटर के सहयोग से संचालित कैंसर यूनिट में अब ओरल कैंसर का ऑपरेशन भी शुरू हो गया है. इसके लिए अस्पताल के सर्जरी विभाग के चिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है.
पहले मरीजों को ऑपरेशन के बाद कीमोथेरेपी और अन्य उपचार के लिए पटना, दिल्ली, मुंबई सहित अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में जाना पड़ता था. इससे समय और धन दोनों की अधिक खपत होती थी. अब अधिकांश सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से मरीजों का खर्च और परेशानी दोनों कम हुई है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सरकार की ओर से हाल के दिनों में कैंसर यूनिट की सुविधाओं का विस्तार किया गया है. यहां नियमित रूप से मरीजों की जांच और उपचार किया जा रहा है.
अब सुपर स्पेशयलिटी यूनिट में 18 बेड
सबसे पहले कैंसर यूनिट फेब्रिकेटेड वार्ड के एक कमरे व चार बेड से शुरू किया गया. यहां मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस यूनिट को 18 बेड के साथ मगध मेडिकल के सुपर स्पेशियलिटी यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया. यहां पर मरीजों को बेहतर सुविधा के साथ जगह की भी कमी नहीं होती है. मरीज पूरी तौर से आरामदेह महसूस करते हैं.
कैंसर यूनिट के लिए बनेगा अलग बिल्डिंग
कैंसर यूनिट के लिए अस्पताल की ओर से अलग बिल्डिंग बनाने के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गयी है. यहां कैंसर मरीजों के लिए नये बिल्डिंग बनने के बाद इनके लिए और सुविधाओं को भी बढ़ाया जायेगा. यहां मरीज की अधिकता देखते हुए यह निर्णय लिया गया है. कुछ माह में ही बिल्डिंग बनने का काम शुरू हो जायेगा.
मरीजों की दी जा रही बेहतर सुविधा
यहां पर कैंसर मरीजों को मुफ्त में इलाज व जांच की सुविधा दी जा रही है. ओरल कैंसर के मरीज का ऑपरेशन शुरू किया गया है. ऐसे इस यूनिट को बेहतर बनाने के लिए अस्पताल अधीक्षक व अन्य सारे डॉक्टर व कर्मचारियों का भरपूर सहयोग मिल रहा है. यहां पर सबसे अधिक बायोप्सी टेस्ट व कीमोथेरेपी के लिए मरीज पहुंच रहे हैं. यहां किसी तरह की भी दिक्कत होने पर उन्हें तुरंत ही हायर सेंटर रेफर किया जाता है. वहां पर भी इनका इलाज की सुविधा के लिए इन्हें भटकना नहीं पड़ता है.
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