बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा चयनित विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालय के शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को कुलपति कार्यालय में उपस्थित होकर अपने लंबित वेतन की समस्या को प्रमुखता से उठाया. ज्ञात हो कि इन नवनियुक्त शिक्षकों को पिछले एक वर्ष या उससे भी अधिक समय से वेतन का भुगतान नहीं हो पाया है.
दस्तावेजों की जांच लंबित
वेतन रोके जाने का मुख्य कारण विश्वविद्यालय द्वारा गठित विभिन्न समितियों के माध्यम से इन शिक्षकों के अनुभव प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया का अब तक लंबित होना है.
अनुच्छेद 21 का उल्लंघन
शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ अनुज कुमार तरुण ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को शिक्षकों का वेतन अविलंब आरंभ करना चाहिए. उन्होंने जोर दिया कि शिक्षकों को वेतन से वंचित रखना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त 'जीवन के अधिकार' का सीधा उल्लंघन है.
अन्य विवि की तर्ज पर मांग
डॉ तरुण ने प्रशासन से मांग की कि बिहार के अन्य विश्वविद्यालयों की तर्ज पर वेतन भुगतान शुरू किया जाए और दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया को जल्द पूरा कर अंतिम निष्कर्ष संबंधित अधिकारियों को शीघ्र प्रेषित किया जाए.
प्रशासन का मिला आश्वासन
शिक्षकों और संघ की जायज मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ विस्तृत चर्चा हुई. प्रशासन की ओर से तुरंत वेतन भुगतान का ठोस आश्वासन नहीं मिला है, किंतु अधिकारियों ने स्थिति को समझते हुए जल्द ही सकारात्मक कदम उठाने और जांच प्रक्रिया पूरी कर समाधान निकालने की उम्मीद जताई है.
